अमेरिकी न्याय विभाग ने सागर अडानी, गौतम अडानी और अन्य पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देकर भारत की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना के ठेके हासिल किए. साथ ही, 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड की पेशकश के दौरान निवेशकों को गुमराह कर अमेरिकी निवेशकों से 175 मिलियन डॉलर जुटाने का आरोप है. न्याय विभाग का दावा है कि इस योजना का उद्देश्य दो दशकों में 2 बिलियन डॉलर का मुनाफा कमाना था.
सागर अडानी, गौतम अडानी के भाई राजेश अडानी के बेटे हैं. उन्होंने ब्राउन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक किया है. 2015 में अडानी समूह में शामिल होने के बाद से सागर ने अडानी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक के रूप में कंपनी के रणनीतिक और वित्तीय विकास का नेतृत्व किया है.
सागर अडानी के नेतृत्व में अडानी ग्रीन एनर्जी ने सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. उन्हें कंपनी के ऊर्जा पोर्टफोलियो का विस्तार करने और इसे वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने का श्रेय दिया जाता है.
सागर अडानी को गौतम अडानी के चार संभावित उत्तराधिकारियों में से एक माना जाता है. अन्य तीन में करण अडानी (गौतम के बड़े बेटे), जीत अडानी (छोटे बेटे) और प्रणव अडानी (चचेरे भाई) शामिल हैं. इस मामले के चलते सागर की नेतृत्व क्षमता और भविष्य में उनके करियर पर नजर बनी रहेगी.
हालांकि आरोप गंभीर हैं, लेकिन अदालत में साबित होने तक ये केवल आरोप ही माने जाएंगे. अडानी समूह ने मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है. सागर अडानी पर लगने वाले आरोप और उनसे निपटने की उनकी रणनीति उनके करियर और अडानी साम्राज्य की दिशा को निर्धारित कर सकती है.