खेती-बाड़ी होगी और आसान! अब ₹5 लाख तक किसान क्रेडिट कार्ड लोन देगी मोदी सरकार
केंद्रीय बजट 2025 में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई, जिससे किसानों को सस्ता और त्वरित लोन मिल सकेगा. 31 दिसंबर 2024 तक केसीसी खातों के तहत दी गई राशि 10 लाख करोड़ रुपये पार कर चुकी है, जिससे 7.72 करोड़ किसानों को फायदा हुआ.

नए वित्तीय वर्ष में कई नए नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनकी घोषणा केंद्रीय बजट 2025 में की गई थी. 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट में किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई. इनमें सबसे बड़ी घोषणा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट को बढ़ाने की रही. अब किसानों को 3 लाख रुपये के बजाय 5 लाख रुपये तक का कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा.
किसान क्रेडिट कार्ड योजना कृषि क्षेत्र में वित्तीय सहायता देने के उद्देश्य से चलाई जाती है. ये कार्ड किसानों को बीज, उर्वरक और कीटनाशक जैसी आवश्यक वस्तुएं खरीदने में मदद करता है. इसके साथ ही, इससे फसल उत्पादन और कृषि से जुड़ी अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ता और त्वरित लोन मिलता है. साल 2019 में इस योजना का दायरा पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी शामिल करने के लिए बढ़ाया गया था.
केसीसी के तहत किसानों को बड़ा फायदा
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट को 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का फैसला किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा. इससे उन्हें अपनी खेती और संबंधित आवश्यकताओं के लिए ज्यादा धनराशि आसानी से उपलब्ध हो सकेगी.
31 दिसंबर 2024 तक केसीसी खातों के तहत दी गई राशि 10 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई, जिससे 7.72 करोड़ किसानों को सीधा लाभ मिला. मार्च 2014 में यह राशि केवल 4.26 लाख करोड़ रुपये थी.
कृषि बजट में कटौती, लेकिन इन क्षेत्रों को बढ़ावा
हालांकि, इस साल के बजट में कृषि मंत्रालय के लिए आवंटित राशि को 2.75% घटाकर 1.37 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. लेकिन सरकार ने संबद्ध क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर इस कमी की भरपाई करने की योजना बनाई है.
- मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के लिए बजट 37% बढ़ाकर 7,544 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
- खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए बजट 56% बढ़ाकर 4,364 करोड़ रुपये किया गया है.
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कृषि, संबद्ध क्षेत्रों और खाद्य प्रसंस्करण का कुल बजट 1.45 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है. सरकार को उम्मीद है कि नई योजनाओं के विस्तृत आवंटन के बाद इस वित्त वर्ष का संशोधित अनुमान 1.47 लाख करोड़ रुपये को पार कर सकता है.