एक दिन में 1300 अंक से नीचे लुढ़का सेंसेक्स, निफ्टी में भी बड़ी गिरावट...क्या ट्रंप का यह फैसला बना बड़ी वजह?

आज भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, खासकर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में. इसका मुख्य कारण अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ को लेकर बढ़ी हुई चिंता है जो 2 अप्रैल से लागू होने वाले हैं. निवेशक इस अनिश्चितता को लेकर घबराए हुए हैं और इसने बाजार को गहरा नुकसान पहुंचाया. क्या इस गिरावट के बाद राहत मिलेगी? जानिए पूरी कहानी!

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Edited By: Aprajita

US Tariff Concerns: मंगलवार को शेयर बाजार में एक बड़ी गिरावट देखने को मिली, जब सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने भारी नुकसान उठाया. इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ को लेकर निवेशकों के मन में चिंता का बढ़ना है. 2 अप्रैल से ये टैरिफ लागू होने वाले हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बन गया है.

अमेरिकी टैरिफ की वजह से बाजार में खलबली

दोपहर 1:42 बजे तक, सेंसेक्स 1,429 अंक गिरकर 75,985 पर पहुंच गया था जबकि निफ्टी 50 भी 342 अंक गिरकर 23,177 पर आ गया. इस दौरान बाजार में उथल-पुथल का माहौल था और कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली. खासतौर पर आईटी सेक्टर में, जिसमें इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) जैसे दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 2% से ज्यादा की गिरावट आई.

ट्रंप के टैरिफ की अनिश्चितता

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय पहले भारत समेत अन्य देशों के खिलाफ पारस्परिक टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो 2 अप्रैल से लागू होने जा रहे हैं. इस कारण, बाजार में एक प्रकार की अनिश्चितता का माहौल बन गया है. व्यापार विश्लेषक मानते हैं कि इस टैरिफ का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है.

हालांकि, भारत और अमेरिका इस मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं, और ऐसी खबरें आ रही हैं कि दोनों देशों के बीच एक समझौता हो सकता है. लेकिन इस समझौते का आधिकारिक ऐलान नहीं होने के कारण निवेशकों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं कि यदि ये टैरिफ लागू होते हैं, तो इसका भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर होगा.

क्या भारतीय बाजार में कोई राहत मिलेगी?

हालांकि, इस अस्थिरता के बीच एक सकारात्मक पहलू भी है. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार का कहना है कि भारत ने मार्च महीने में अधिकांश वैश्विक बाजारों को पछाड़ते हुए 6.3% का रिटर्न दिया. इसका कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख था, जिन्होंने भारतीय बाजार में खरीदी की और बाजार में तेजी का माहौल पैदा किया.

विजयकुमार के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव के बाद बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन व्यापार समझौते के संभावित परिणामों के कारण बाजार में स्थिरता भी आ सकती है. खासकर भारत को अमेरिका के साथ किसी समझौते की संभावना है, जिससे कनाडा, मैक्सिको और चीन जैसे देशों के मुकाबले भारत पर इसका असर कम हो सकता है.

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

निवेशकों को इस समय सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अमेरिकी टैरिफ लागू होते हैं, तो कुछ कंपनियों के शेयरों पर इसका असर हो सकता है, लेकिन दीर्घकालिक निवेश के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद एक स्थिरता भी आ सकती है. इसीलिए, अगर आप निवेशक हैं तो आपको इस वक्त समझदारी से निवेश निर्णय लेने की आवश्यकता है, ताकि आप इस वैश्विक अस्थिरता का फायदा उठा सकें.

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01 April 2025, 02:08 PM IST

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