न साइकिल न कार, अर्थी के माध्यम से ताल ठोक रहे 'अर्थी बाबा', जानिए कौन
Lok sabha Election 2024: देश भर में इस समय चुनाव का पर्व चल रहा है. जिसकों लेकर हर दिन कोई न कोई नामांकन भरता है.
Lok sabha Election 2024: देश भर में इस समय चुनाव का पर्व चल रहा है. जिसकों लेकर हर दिन कोई न कोई नामांकन भरता है. नामांकन के लिए कोई तो कार से जाता है तो कोई बाइक से तो कोई अपने हिसाब से बजट देखकर जाता है. इस समय उत्तर प्रदेश प्रयागराज से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जिसमें अर्थी बाबा के नाम से जानने वाले ने अर्थी में बैठकर पर्चा भरा है जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
गोरखपुर के प्रत्याशी अर्थी बाबा की बात करे तो इनका नाम अनुरूप यादव उर्फ अर्थी बाबा ने अर्थी पर सवाल होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में गोरखपुर सीट से नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने की घोषणा की है. अर्थी बाबा ने कहा कि विचित्र नामांकन जुलूस मंगलवार को निकाला जाएगा. जिनका अभियान कार्यालय भी राप्ती नदी के किनारे श्मशान घाट पर स्थित है.
बाबा अपने प्रचार के दौरान चिता पर बैठे लोगों से मिल रहे हैं. कई अन्य वादों के अलावा वह लोगों को मोबाइल फोन पर बंद की गई आजीवन इनकमिंग कॉल को फिर से चालू करने का अश्वासन दे रहे हैं. अर्थी बाबा की पढ़ाई की बात करें तो ये MBA ग्रेजुएट हैं. पहले भी कई बार चुनाव लड़ चुके हैं और असफल रहे हैं. अपना चुनाव खर्च श्मशान स्थल पर आने वाले लोगों के योगदान 1 रुपये से इकट्टा करते हुए.
अर्थी बाबा ने कहा कि जो लोग उनके चुनाव फंड के लिए योगदान दे रहे हैं वे अत्माएं है जबकि वह उनके एजेंट हैं. अपने अपरंपरागत पर उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को खतरा है. लगभग अंतिम संस्कार के कगार पर है और मरने के लिए कगार पर है, आगे उनका कहना है कि इसे ने मुझे श्मशान घाट पर अपना कार्यालय स्थापित करने और चिता पर बैठकर नामांकन दाखिल करने के लिए प्रेरित किया.
संसद के अंदर जाने वाले लोकतंत्र की शवयात्रा के साथ जुड़ने की अपील करते हुए यादव ने कहा कि जो आगामी दिल्ली में विधानसभा चुनाव होगा उसमें भी हम लड़ने की योजना बना रहे हैं.अपनी टीम के साथ केजरीवाल की सत्ता को हटाने के लिए सभी 70 सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. आगे कहा कि यादव समाज में सार्थक बदलान लाने के लिए राजनीतिक नेताओं को बुध्द की शिक्षा को अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हैं.