'कैसे एक कलाकार को लोकतांत्रिक तरीके से मारा जाए...' कुणाल कमरा ने शेयर किया नया पोस्ट
कॉमेडियन कुणाल कमरा ने मंगलवार को इंस्टाग्राम पर एक तीखी पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने सरकार पर कलाकारों की आवाज को दबाने के सुनियोजित प्रयास का आरोप लगाया. यह पोस्ट एकनाथ शिंदे पर की गई उनकी टिप्पणियों के बाद उठे विवाद के बीच आई। कमरा ने अपनी पोस्ट में एक "प्लेबुक" का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कलाकारों के खिलाफ उठाए गए कदमों का विवरण दिया, जिनसे उनकी अभिव्यक्ति को दबाया जाता है.

कॉमेडियन कुणाल कमरा ने मंगलवार को एक तीखी पोस्ट में यह आरोप लगाया कि सरकार कला और कलाकारों की आवाज को दबाने के लिए एक सुनियोजित प्रयास कर रही है. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ अपनी टिप्पणियों के बाद उठे विवाद के बीच, कुणाल कमरा ने इंस्टाग्राम पर "How to kill an Artist ‘democratically’" (कैसे एक कलाकार को ‘लोकतांत्रिक’ तरीके से मारा जाए) नामक पोस्ट शेयर किया. इस पोस्ट में उन्होंने कलाकारों के खिलाफ उठाए गए कथित कदमों को एक "प्लेबुक" के रूप में सामने रखा, जिसका इस्तेमाल सत्ता में बैठे लोग उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने के लिए करते हैं.
कमरा का यह बयान उनके शो में की गई एक परोडी के बाद आया, जिसमें उन्होंने शिव सेना प्रमुख एकनाथ शिंदे का मजाक उड़ाया था. इस पर शिव सेना के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के हैबिटेट कॉमेडी क्लब में उत्पात मचाया था. इसके बाद, कमरा को कई पुलिस मामलों का सामना करना पड़ रहा है और मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ जांच के सिलसिले में उनके घर पर भी दबिश दी
कलाकार को मारा जाए
कुणाल कमरा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “कैसे एक कलाकार को मारें: एक स्टेप बाय स्टेप गाइड.” उन्होंने इस प्रक्रिया को पांच चरणों में बांटा.
1. प्रचार का स्तर बढ़ाएं - पहले तो इतना विरोध उत्पन्न करें कि ब्रांड्स उनकी काम की कमी करें.
2. विरोध को और बढ़ाएं - तब तक विरोध बढ़ाएं जब तक निजी और कॉर्पोरेट शो भी बंद न हो जाएं.
3. विरोध को और जोर से करें - ताकि बड़े मंच भी जोखिम लेने से बचें.
4. विरोध को हिंसक करें - तब तक कि छोटे-छोटे स्थल भी उनके कार्यक्रमों को खारिज कर दें.
5. श्रोताओं को सवालों के घेरे में लें- कला को अपराध का रूप दे दें, ताकि कलाकार के पास केवल दो विकल्प हों. या तो वे अपनी आत्मा बेच दें और पैसे के लिए नाचें, या चुपचाप शांति से मर जाएं. कमरा ने आगे लिखा, "यह सिर्फ एक प्लेबुक नहीं है, यह एक राजनीतिक हथियार है. यह एक चुप्पी की मशीन है."
सरकार द्वारा आलोचना और उत्पीड़न
कमरा ने अपनी टिप्पणियों के साथ एक और मुद्दे की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक हमला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का प्रयास सिर्फ एक कला रूप पर नहीं, बल्कि पूरे समाज की आवाज़ पर हमला है. उन्होंने अपने बयान में कहा, "यह सिर्फ मेरे लिए नहीं है, यह उन सभी के लिए है जो सत्ता की आलोचना करते हैं और जो दूसरों की आवाज़ को उठाने की कोशिश करते हैं."
कलाकार का हक
कुणाल कमरा पर लगे मामलों के बीच, मद्रास हाई कोर्ट ने पिछले शुक्रवार को उन्हें अंतरिम अग्रिम जमानत दी. कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सैटायर को स्वतंत्र अभिव्यक्ति के तहत सुरक्षित माना जाता है और कमरा ने अपने शो में किसी खास नाम का उल्लेख नहीं किया था. उनकी परफॉर्मेंस वीडियो मार्च 23 को रिलीज हुई थी और यह जनवरी में शूट किया गया था. कमरा के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि उनका यह शो स्वतंत्र अभिव्यक्ति के तहत आता है और यह उनके हक की रक्षा करता है.
अंतिम शब्द
कुणाल कमरा की यह पोस्ट और बयान एक बड़ा सवाल उठाते हैं. क्या सरकार और प्रशासन कलाकारों की आवाज़ दबाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं? क्या स्वतंत्रता की आवाज़ को नियंत्रित करने का यह तरीका लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ नहीं है?