हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की एक नई तस्वीर सामने आयी है जिसमें अयोध्या मस्जिद निर्माण में सबसे ज्यादा दान हिंदुओं ने दिया। 9 नवंबर 2019 में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन दी गई। फैसले के बाद सुन्नी बक्फ बोर्ड ने मस्जिद बनाने के लिए एक ट्रस्ट बनाया है। ट्रस्ट का नाम इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (आईआईसीएफ) है। मस्जिद निर्माण के लिए सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि पूरे देश से चंदा आया। ट्रस्ट ने ये रकम गिनी तो हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की एक नई तस्वीर सामने आई। मस्जिद बनाने के लिए अब तक मिले कुल दान का 40% हिस्सा हिंदुओं ने दिया है।

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने एक अखबार को दिए साक्षात्कार में बताया कि 15 दिन पहले पता चला कि हमें मिली जमीन एग्रीकल्चर यूज वाली है,उसमें कंस्ट्रक्शन नहीं कर सकते। हमने लैंड यूज चेंज करने और उस पर 7 मंजिला बिल्डिंग बनाने के लिए अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी को आवेदन दे दिया है। अगस्त, 2020 में मस्जिद निर्माण में सहयोग के लिए बैंक डिटेल जारी किए गए थे। अब तक ट्रस्ट के पास 40 लाख रुपये का डोनेशन आ चुका है। इनकम टैक्स एक्ट की धारा-80G के तहत दान देने वालों को टैक्स में छूट दी गई है। डोनेशन का करीब 30% हिस्सा कॉर्पोरेट से आया है,30% मुस्लिम समुदाय से आया है बाकी 40% हिस्सा हिंदू समुदाय की तरफ से आया है। मस्जिद बनाने के लिए पहला दान लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय के सदस्य रोहित श्रीवास्तव ने दिया था। दान की राशि 21 हजार रुपये थी। इसके साथ ही अवध यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आरके सिंह समेत तमाम हिंदू ने दान दिया है। ट्रस्ट के पदाधिकारी अलग-अलग जगहों पर जाकर लोगों को पूरा प्लान समझाने का काम करने वाले हैं। अयोध्या शहर से फैजाबाद होते हुए जब आप सुहावल चौराहे से थोड़ा आगे बढ़ेंगे तो आपको धन्नीपुर गांव मिलेगा। मेन रोड से डेढ़ किमी अंदर जाने पर 5 एकड़ जमीन दिखाई देगी जो सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद बनाने के लिए दी है। यहां एक मजार पहले से मौजूद है। ये मजार 50 साल से ज्यादा पुरानी है। पहले कच्ची हुआ करती थी। 40 साल पहले इसे पक्का बनाया गया है। ये हजरत शाहगदा शाह की मजार है। मस्जिद सहित तमाम भवनों का निर्माण इसी जमीन पर होगा लेकिन ये मजार नहीं हटाई जाएगी।

मुस्लिम कम्युनिटी ने पूरे देश को ये संदेश देने की कोशिश की कि हमारे दिल में कोई मलाल नहीं है। फैसले के 10 महीने बाद जमीन की रजिस्ट्री इस ट्रस्ट के नाम पर हुई। अब ये ट्रस्ट ही जमीन पर एक बड़ी मस्जिद बनवाएगा जिसमें 2 हजार से ज्यादा नमाजी एक साथ नमाज पढ़ सकेंगे। मस्जिद के साथ ही यहां 3 इमारतें और बनाई जाएंगी जो हर धर्म के लोगों के लिए होंगी। बिल्डिंग- 1 में मस्जिद ट्रस्ट जमीन पर मेदांता की तर्ज पर 300 बेड का एक मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल भी बनाएगा। इस हॉस्पिटल में इलाज पूरी तरह फ्री रहेगा। बिल्डिंग -2 फ्री में खाना खिलाने वाला जमीन पर एक कम्युनिटी किचन भी बनाया जाएगा जिसमें हर दिन 1000 से ज्यादा लोग खाना खा सकेंगे। ये सेवा भी पूरी तरह फ्री रहेगी। बिल्डिंग -3 में मस्जिद के बगल में ही मुस्लिमों का योगदान समझाने वाला एक रिसर्च सेंटर बनाया जाएगा। इसमें ये पढ़ाया, सिखाया और बताया जाएगा कि राष्ट्र निर्माण में हिंदुस्तानी मुसलमान का कितना बड़ा योगदान है। इससे समाज में बढ़ रही नफरतें दूर होंगी। दरअसल, अयोध्या मस्जिद ट्रस्ट को जो जमीन मिली है वहां पर जाने के लिए दो एप्रोच रोड हैं। एक पूर्व की तरफ जोड़ती है और दूसरी पश्चिम की तरफ। ये दोनों रोड 4.10 मीटर चौड़ी हैं। जमीन पर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बननी है। निर्माण के लिए बड़े-बड़े वाहनों को अंदर आना है, इसके लिए 12 मीटर चौड़ी रोड की जरुरत है।

हालांकि “अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी से अभी नक्शा पास नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि फायर एनओसी लेने की प्रक्रिया शुरू की गई तो पता लगा कि सकरी सड़क की वजह से एनओसी नहीं मिल सकती।” 36 महीने बाद पता चला, जमीन पर बिल्डिंग ही नहीं बन सकती। अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी के पास सड़क चौड़ी करने का आवेदन दिया गया है। हैरानी की बात है कि अधिकारियों ने 3 साल बाद  बताया कि नक्शा पास नहीं हो सकता। मस्जिद वाली जमीन खेती के लिए है कंस्ट्रक्शन के लिए नहीं। हालांकि लैंड यूज चेंज करने के लिए आवेदन 5 नवंबर, 2022 को आवेदन किया गया है। नक्शा पास होते ही अगले ही दिन निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।