हैदराबाद: तेलंगाना राज्य पर केंद्र सरकार ने कई अनावश्यक प्रतिबंध लगा रखे है। जिसके बाद से तेलंगाना के राजस्व संग्रह में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कमी देखी गई है। राज्य के सीएम के. चंद्रशेखर राव अब एक सप्ताह के लिए विधायी सत्र का आयोजन करेंगे। सीएम का विधायी सत्र को लागू करने के पीछे का कारण है राज्य के लोगों को विस्तार से सूचित करना। वहीं इसको लेकर सीएम ने राज्य के वित्तमंत्री हरीश राव और विधायी मामलों के मंत्री प्रशांत रेड्डी को सूचित किया और ठोस कदम उठाने के लिए कहा है।

बता दे, केंद्र को सीएम केसीआर पहले ही कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि हम कोई भी कठिनाई सहन करेंगे लेकिन हम केंद्र सरकार के बिजली सुधारों को स्वीकार नहीं करेंगे जिससे तेलंगाना के किसानों और कृषि को नुकसान होगा। राज्य को करीब 6 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। केंद्र ने राज्य को मिलने वाले 20,000 करोड़ के गैर-बजटीय फंड को भी रोक दिया। केंद्र की गलत नीतियों के कारण तेलंगाना राज्य को 40 हजार करोड़ से अधिक की धनराशि का नुकसान हुआ।

राज्य सरकार ने कहा कि, "उनके पास राज्य के विकास के लिए ऋण के रूप में दिए गए धन को चुकाने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहारा है और इस तरह के समझौतों का उल्लंघन उचित नहीं है। वित्तीय संस्थान राज्य के आश्वासन के साथ पूर्व में किए गए समझौतों के अनुसार इस बीच धन जारी करते रहे हैं। ऐसे ही हर कदम पर केंद्र की भाजपा सरकार तेलंगाना राज्य को आर्थिक रूप से कमजोर बनाकर तेलंगाना की प्रगति की राह में रोड़े अटका रही है।"

राज्य सरकार का कहना है कि, "प्रत्येक वर्ष संबंधित राज्यों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रगति योजनाएँ बनाई जाती हैं। लेकिन केंद्र द्वारा अपनी इच्छा के अनुसार लिए गए अनुचित निर्णयों के कारण विकास रुक जाता है और समय पर धन की कमी के कारण राज्यों की प्रगति बाधित हो जाती है। तेलंगाना सरकार राज्य के लोगों के साथ-साथ देश के लोगों के ध्यान में ऐसे अप्रासंगिक मामलों को लाना चाहती है जो केंद्र द्वारा उठाए जा रहे हैं।"