देश-दुनिया में उपस्थित सभी चीजों में भिन्नता है। कुछ चीजें बहुत ही खूबसूरत औऱ अद्बुत होती है तो कुछ चीजें बहुत ही अविश्वसनीय होती है। उन प्राकृतिक चीजों में कुछ भी सम्मिलित हो सकता है। लेकिन आज हम आपको कई साल पुरानी रहस्यमयी मुर्तियों के बारें में बताने जा रहे है। जानिए ये कौन सी मूर्ति है और कहां पाई गई है?

जम्मू कश्मीर के बडगाम जिले के गुडसाथू गांव में खुदाई के दौरान दो प्राचीन मूर्तीयों में भगवान विष्णु की 9वीं शताब्दी की मूर्ति भी शामिल है। भगवान विष्णु जी की मुर्ती के अलावा एक जगह पर पंचमुखी मुर्ती का हिस्सा मिला। ग्रामीणों ने इसकी सुचना पुलिस को दी। पुलिस को जानकारी मिलते ही एक टीम को मौके पर भेजा। पुलिस ने पुलिस ने मुर्ति को बरामद कर जिला पुलिस मुख्यालय ले गई।

यह जो भगवान विष्णु जी की जो मूर्ति मिली है। यह मूर्तिकला लगभग नौंवी शताब्दी ईस्वी पूर्व की है और लगभग 1200 पुरानी बताई जा रही है। जिसमें आपको बता दें कि भगवान विष्णू की मूर्ति तीन सिरों और चार हाथ वाली है। मूर्ति के ऊपरी दाहिए हाथ पर एक कमल है। विशेषज्ञ दल ने बताया कि मूर्तिकला गांधार और मथुरा स्कूल ऑफ ऑर्ट का मिश्रण है। 

यह गंधार और मधुरा शैली में निर्मित है। इसके अलावा खाग क्षेत्र में भी खोदाई में एक अन्य मूर्ति मिली है। जांच के यह पता चलता है कि यह मूर्ति किसी पंचमुखी मूर्ति का हिस्सा है। इन दोनो ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों को हमने अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक मुश्ताक अहमद बेह को सौंप दिया है।

दूसरी मूर्ति बडगाम के खाग इलाके से बरामद हुई है। विभाग के अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय की टीम ने जांच की तो पता चला कि यह मूर्ति पंचमुख का हिस्सा है। पुलिस ने दोनों कलाकृतियों को उप निदेशक, अभिलेखागार विभाग, पुरातत्व और संग्रहालय, कश्मीर को सौंप दिया।

चेन्नई में खुदाई के दौरान 12000 साल पुरानी कलाकृतियां

तामिलनाडु राज्य के चेन्नई जिले के प्राचीन पत्थर के उपकरण बनाने की जगह मिली है। यह करीब 12,000 साल पहले की है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण टीम को एक गड्ढों की परत में चार सभ्यताओं की कलाकृतियां मिली है। यह खुदाई वडक्कुपट्टू गांव में हो रही है। इस खुदाई के दौरान मेसोलिथिक काल की हाथ से बनी कुल्हाड़ी और गंडासे जैसे औजार भी मिले है।  सैकड़ो पत्थर के टुकड़ो के साथ सतह से सिर्फ 75 सेमी नीचे पाए गए। जहां प्राचीन लोग शिकार करने के लिए एक साथ पत्थर के औजार बनाते थे। इसे पत्थर बनाने की फैक्ट्री भी कहा जाता है।