हैरानी की बात यह है कि इन खातों में परिवार के भरण-पोषण के नाम पर कतर, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब से 500 करोड़ रुपये आए। एनआईए का दावा है कि यह राशि मनी ट्रांसफर के जरिए अलग-अलग खातों में भेजी गई है। वहीं, इन खातों में से एक लाख खाते पीएफआई की गतिविधियों में सक्रिय लोगों के हैं एवं शेष दो लाख खाते उनके रिश्तेदारों एवं परिचितों के हैं। एनआईए इस बात की जांच कर रही है कि इन खातों में आने वाले पैसों का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है। एनआईए को इस मामले में आरोपियों से पूछताछ के दौरान तब्लीगी जमात और जमीयत उलेमा-ए-हिंद (जेयूएच) की भूमिका की जानकारी मिली है। 22 सितंबर को एनआईए और ईडी ने टेरर फंडिंग केस में नि:संदेह बड़ी कार्रवाई की है। क्योंकि, कोई संगठन देश के खिलाफ आतंकवाद को पोषित करने का काम करेगा तो जांच एजेंसियां चुप कैसे बैठेंगी।

पीएफआई पर बड़ी कार्रवाई की योजना गृहमंत्री अमित शाह के 4 अगस्त को बेंगलुरु दौरे के दौरान बनाई थी। 7 अगस्त को इसके लिए एक टीम बना दी गई थी। इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पीएफआई कथित तौर पर कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है, लेकिन यह भी आश्यर्च की बात है कि इस पर अब तक बैन नहीं लगा है।हालांकि एनआरसी के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों में भी पीएफआई की भूमिका सामने आई थी। लेकिन, कर्नाटक के बीजेपी नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या के बाद ये संगठन केंद्र सरकार के रडार पर आ गया था। यह सर्वविदित है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने आतंकवाद के खिलाफ हर मंच से आवाज बुलंद की है और यही कारण है कि भाजपा सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि इस संगठन पर सरकार जल्द बैन लगा सकती है। देश के 23 राज्यों में पीएफआई ने अपने पैर पसार लिए हैं। इसका मतलब यह हुआ कि सरकार को चुनौती देने की ताकत पीएफआई ने बना ली है। इसके पीछे उसके मंसूबे क्या हैं? यह सरकार और जांच एजेंसियों को समझ में आ गई है। इसलिए, गृहमंत्री ने एक साथ इतनी बड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। एनआईए की एक्शन टीम कर्नाटक ही नहीं, बल्कि देश के सभी हिस्सों में पीएफआई के खिलाफ 3 मोर्चों पर काम करेगी।टीम मुख्य रूप से पीएफआई के विरुद्ध ऐसे डॉक्यूमेंट एकत्र करेगी जो राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके षडयंत्र का खुलासा कर सकें। इससे पहले राजस्थान के उदयपुर हत्याकांड में भी पीएफआई का हाथ होने की बात सामने आयी थी। इस बीच पटना में भी पीएफआई के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हो चुका है। इसलिए सरकार का कड़ा एक्शन देशहित में जरूरी हो गया था।