बिहार के शिक्षामंत्री चंद्रशेखर के बवाली बयान के बाद अब यूपी की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता और अखिलेश यादव के सिपहेसलार स्वामी प्रसाद मौर्य  ने रामचरितमानस पर सवाल उठाए हैं। इनका नाम तो स्वामी है...लेकिन काम बवाली है... सपा ने इसी अपने बवाली नेता को अकेला छोड़ दिया है।

बता दें कि रामचरितमानस पर शुरू हुआ बयानों का खेल लगातार जारी है। अपने नेता के विवादित बयान पर सपा ने किनारा कर लिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने सीधे किनारा करते हुए, बड़ी बात कही है। वहीं सपा नेता शिवपाल यादव ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने जो बयान दिया है वह उनका व्यक्तिगत बयान है। हम भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के आदर्शों पर चलने वाले लोग हैं, उनका बयान पार्टी का बयान नहीं है। रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाए पर वचन ना जाए.. ये हमारा ध्येय सालों से रहा और आगे भी रहेगा।

गौरतलब है कि सपा एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य ने मीडिया में दिए गए बयान में रामचरितमानस में लिखा गया सब बकवास बताया था। उनके मुताबिक कई करोड़ लोग रामचरितमानस को नहीं पढ़ते हैं... सब बकवास है...ये तुलसीदास ने अपनी खुशी के लिए लिखा है... स्वामी के इस बयान के बाद विवाद ने जोर पकड़ा तो लगातार बीजेपी समेत दूसरे दलों ने भी पलटवार किया। बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि स्वामी विक्षिप्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान तो कोई विक्षिप्त ही दे सकता है। सपा का इतिहास रहा है कि उन्होंने हमेशा धार्मिक उत्सवों और पर्वों पर प्रतिबंध लगाने का काम किया है।

ऐसा नहीं है, कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने पहली बार ऐसा राम और आस्था को लेकर सवाल उठाये हो। इससे पहले जब वो बहुजन समाज पार्टी में थे, तब भी एक किताब आई थी, जिसको लेकर विवाद हुआ था। जिसमें भगवान बृह्मा और सरस्वती से लेकर तमाम देवताओं के बारे में आपत्तिजनक बातें लिखी थीं। अब समाजवादी पार्टी में आने के बाद भई स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस को बंद करने की वकालत की है।