कांग्रेस ने प्राइवेट कॉलेजों में SC, ST और OBC को आरक्षण दिलाने की उठाई मांग, 20 साल पहले किया था इस मुद्दे से किनारा!
कांग्रेस ने प्राइवेट कॉलेजों में SC, ST और OBC के लिए आरक्षण की मांग उठाई है. यह मांग सुप्रीम कोर्ट के फैसले और संसदीय समिति की सिफारिश पर आधारित है. कांग्रेस ने इसे अपने चुनावी वादे के रूप में रखा है. अब देखना ये होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है.

Congress Reignites Demand: देश में जातिगत आरक्षण एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, और अब इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ गई है. कांग्रेस ने हाल ही में एक बड़ी मांग उठाई है, जिसमें पार्टी ने प्राइवेट कॉलेजों में भी एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण देने की बात की है. यह मांग कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने उठाई, और कहा कि संविधान के आर्टिकल 15(5) के तहत निजी संस्थानों में भी आरक्षण लागू किया जाना चाहिए.
कांग्रेस की पुरानी बात पर नया मोड़
आपको यह जानकर दिलचस्प लगेगा कि यह मामला लगभग 20 साल पहले आया था. उस समय यूपीए-1 सरकार के दौरान संविधान में 93वां संशोधन किया गया था, जिसके तहत आर्टिकल 15(5) लाया गया था. इसके माध्यम से सरकारी संस्थानों में आरक्षण लागू किया गया था, लेकिन प्राइवेट संस्थानों के लिए इसे लागू नहीं किया गया. अब दो दशकों के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को फिर से तूल देना शुरू किया है, जिसके तहत वह प्राइवेट कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी आरक्षण देने की मांग कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने दी थी हरी झंडी
2008 में इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की थी और तब कोर्ट ने कहा था कि निजी संस्थानों में आरक्षण का मुद्दा विचारणीय है. हालांकि, इस समय तक इस पर कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया था. अब कांग्रेस ने एक बार फिर इस मुद्दे को उठाया है और यह दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि एससी, एसटी और ओबीसी को निजी संस्थानों में आरक्षण मिल सकता है.
कांग्रेस का चुनावी वादा
2024 के आम चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में भी इस आरक्षण को लागू करने का वादा किया था. अब, एक संसदीय समिति की सिफारिश के बाद कांग्रेस ने इस मांग को और तेज कर दिया है. इस समिति का नेतृत्व कांग्रेस के सांसद दिग्विजय सिंह कर रहे हैं, और उन्होंने भी प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की बात की है.
आरक्षण के लिए कानून की आवश्यकता
हालांकि, जानकारों का मानना है कि केवल आर्टिकल 15(5) के तहत ही यह आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता. इसके लिए एक नया कानून बनाना होगा, जो इसे समर्थन प्रदान करे. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में कहा था कि शिक्षा संस्थान स्थापित करना एक मौलिक अधिकार है, और इन संस्थानों को यह तय करने का अधिकार है कि प्रवेश प्रक्रिया कैसी होगी.
क्या होगा अगला कदम?
अब देखना यह होगा कि कांग्रेस की इस मांग पर केंद्र सरकार क्या प्रतिक्रिया देती है. इस वक्त देश के किसी भी निजी शिक्षण संस्थान में जातिगत आरक्षण लागू नहीं है लेकिन इसके बाद अगर यह कानून बनता है तो इसका देश के शिक्षा तंत्र पर बड़ा असर पड़ सकता है. कांग्रेस ने एक बार फिर जातिगत आरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है और यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है. निजी कॉलेजों में आरक्षण के बारे में सोच-विचार का दौर अब फिर से शुरू हो गया है, और इससे देशभर में एक नई बहस का आगाज हो सकता है.