जस्टिस वर्मा के घर से नकदी बरामद, आग और रहस्यमयी कॉल्स ने बढ़ाई साजिश की शंका! आखिर क्या छुपाने की कोशिश की गई थी?
दिल्ली के एक उच्च न्यायालय जज के घर से जली हुई नकदी की गड्डियाँ मिलीं और फिर आग के बाद तीन रहस्यमयी कॉल्स ने इस मामले को और उलझा दिया. क्या ये सब कुछ छुपाने की कोशिश थी? जानिए क्या था पूरा मामला और कैसे जांच ने नए सवाल खड़े कर दिए. पूरी कहानी जानने के लिए पढ़े!

New Delhi: दिल्ली में एक बड़े विवाद के बाद, दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के घर से कथित तौर पर नकदी की जली हुई गड्डियाँ बरामद की गई हैं. इस मामले ने तूल तब पकड़ा जब 14 मार्च की रात को एक अजीब सी घटना हुई, जब वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई. इस आग के बाद, सबकी नज़रें तीन रहस्यमयी कॉल्स पर हैं, जो दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) द्वारा की गई थीं. क्या यह सब कुछ जानबूझकर छुपाने की कोशिश थी?
आग के बाद आए रहस्यमयी कॉल्स
14 मार्च की रात को, दिल्ली में न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास में एक बड़ी आग लग गई. सूत्रों के मुताबिक, अग्निशमन सेवाओं को कुल तीन कॉल की गईं, और इन कॉल्स के कारण मामले में और भी रहस्य घेरने लगे हैं. पहली कॉल रात 11:35 बजे की गई, जब आग लगी थी और आग की स्थिति को बताने के लिए हेल्पलाइन नंबर 101 पर संपर्क किया गया. लेकिन बाद में, एक दूसरी कॉल आई, जिसमें कहा गया कि आग पूरी तरह से नियंत्रण में है, और फायर टेंडर भेजने की ज़रूरत नहीं है. यह कॉल एक 'स्टॉप कॉल' थी, जो केवल अग्निशमन अधिकारियों द्वारा की जा सकती है और यह रहस्य बना हुआ है कि यह कॉल किसने की और क्यों? इसके बाद, तीसरी कॉल की गई, जिसमें डीएफएस को आग की घटना के बारे में फिर से सूचित किया गया. ये कॉल्स मामले को और भी संदेहास्पद बनाती हैं और यह सवाल उठता है कि क्या यह सबकुछ छुपाने की कोशिश की जा रही थी.
नकदी बरामदगी पर उठे सवाल
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह पता चला कि वर्मा के आवास से जली हुई नकदी की गड्डियाँ बरामद की गईं. ये नकदी किसकी थी, यह सवाल अब तक जवाबहीन है. न्यायमूर्ति वर्मा ने इन आरोपों का पुरजोर खंडन किया और कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने कभी अपने आवास के स्टोर रूम में नकदी रखी थी. अब इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट दोनों में जांच की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश दिया हालांकि, इस स्थानांतरण को कथित नकदी बरामदगी से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है.
क्या है मामला?
इस पूरे विवाद ने तब तूल पकड़ी जब 22 मार्च को भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने एक तीन सदस्यीय समिति गठित की, जो इस मामले की गहन जांच करेगी. दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने भी मामले की रिपोर्ट तैयार की, जिसमें न्यायमूर्ति वर्मा के आवास से बरामद नकदी की तस्वीरें और वीडियो शामिल थे. इस रिपोर्ट को अब सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है. न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच अभी भी चल रही है और यह देखना बाकी है कि क्या वास्तव में कोई 'कथित लीपापोती' की कोशिश की गई थी या फिर यह पूरी घटना एक बड़ी साजिश का हिस्सा है.
अब क्या होगा?
इस मामले में अब तक जितनी भी जानकारी सामने आई है, उससे यह साफ है कि कई रहस्यमय पहलू हैं. नकदी की बरामदगी और रहस्यमयी कॉल्स ने मामले को और भी पेचिदा बना दिया है. क्या यह एक साधारण गलती थी या फिर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा? समय ही बताएगा. फिलहाल, जांच जारी है और सभी की नज़रें इस मामले के हर नए मोड़ पर हैं.