संविधान भी बदल देंगे अगर जरूरत पड़ी – मुस्लिम आरक्षण पर DK शिवकुमार का बड़ा बयान!
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के मुस्लिम आरक्षण को लेकर दिए गए बयान से हंगामा मच गया है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो संविधान में बदलाव भी किया जाएगा. भाजपा ने इसे संविधान के साथ खिलवाड़ बताया और संसद में जोरदार हंगामा हुआ. अब सवाल उठ रहा है – क्या कांग्रेस सच में मुस्लिम आरक्षण के लिए संविधान बदलने की तैयारी में है? पूरा मामला जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर!

DK Shivakumar Big Statement: कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के मुस्लिम आरक्षण को लेकर दिए गए बयान के बाद सियासत गरमा गई है. संसद में विपक्ष और सरकार के बीच जमकर बहस हुई और यहां तक कि लोकसभा और राज्यसभा में हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
क्या कहा डीके शिवकुमार ने?
डीके शिवकुमार ने कहा था कि कर्नाटक सरकार द्वारा ठेकों (कॉन्ट्रैक्ट्स) में मुस्लिमों को 4% आरक्षण देने का फैसला असल में मुस्लिम आरक्षण की दिशा में पहला कदम है. उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में मुस्लिमों को आरक्षण देने के लिए संविधान में बदलाव भी किया जा सकता है. उनके इस बयान के बाद भाजपा ने जोरदार विरोध जताया और इसे असंवैधानिक करार दिया.
रिजिजू का पलटवार – 'संविधान बदलने की बात फ्रॉड'
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने डीके शिवकुमार के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि 1947 में भी मुस्लिम आरक्षण की मांग उठी थी लेकिन इसे यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि आरक्षण का आधार केवल सामाजिक और आर्थिक हो सकता है धार्मिक नहीं. रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस संविधान में बदलाव कर आरक्षण देने की बात कहकर बाबा साहब अंबेडकर के बनाए संविधान का अपमान कर रही है. उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से इस पर सफाई देने की मांग की.
लोकसभा-राज्यसभा में हंगामा
डीके शिवकुमार के बयान को लेकर भाजपा सांसदों ने संसद में जमकर विरोध किया. लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने कांग्रेस पर संविधान से छेड़छाड़ करने की कोशिश का आरोप लगाया. हंगामे के कारण सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
क्या है आरक्षण को लेकर संविधान का नियम?
संविधान में आरक्षण का प्रावधान सामाजिक और आर्थिक आधार पर किया गया है, न कि धार्मिक आधार पर. 1947 में जब मुस्लिम लीग ने मुस्लिमों के लिए अलग से आरक्षण की मांग उठाई थी तो इसे संविधान निर्माताओं ने यह कहकर खारिज कर दिया था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) देश है जहां आरक्षण जाति और आर्थिक स्थिति के आधार पर दिया जाएगा धर्म के आधार पर नहीं.
BJP की मांग – कांग्रेस रखे अपना पक्ष
BJP ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा है. रिजिजू ने कहा कि यह गंभीर मामला है और कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह डीके शिवकुमार के बयान से सहमत है या नहीं. इस बयान के बाद कांग्रेस और BJP में तलवारें खिंच गई हैं. BJP इसे संविधान के साथ खिलवाड़ बता रही है जबकि कांग्रेस अपने नेता के बयान पर सफाई देने से बच रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है और इसका असर कर्नाटक की राजनीति से लेकर देशभर में दिख सकता है.