प्रवेश वर्मा होंगे दिल्ली के नए डिप्टी सीएम, कैसे मुख्यमंत्री की रेस से हुए बाहर?
बीजेपी ने दिल्ली के नए मुख्यमंत्री के रूप में रेखा गुप्ता और डिप्टी सीएम के रूप में प्रवेश वर्मा का नाम घोषित किया है. विधानसभा चुनाव में प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल को हराकर सीएम पद की रेस में आगे बने हुए थे, लेकिन पार्टी ने रेखा गुप्ता को सीएम चुना.

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली के नए मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम के नामों की घोषणा की. शालीमार बाग से बीजेपी की विधायक रेखा गुप्ता को दिल्ली का नया मुख्यमंत्री चुना गया है, जबकि प्रवेश वर्मा को दिल्ली का डिप्टी सीएम बनाया गया है. साथ ही रोहिणी से विधायक विजेंद्र गुप्ता को विधानसभा का स्पीकर नियुक्त किया गया है. बीजेपी की विधायक दल की बैठक में इन नामों पर मुहर लगाई गई. अब दिल्ली में बीजेपी की नई सरकार 20 फरवरी को रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे.
सीएम रेस से क्यों पिछड़ गए प्रवेश वर्मा?
दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी नेता प्रवेश वर्मा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हराया था, जिससे उनकी सीएम की रेस में आने की उम्मीदें प्रबल हो गई थी. उन्हें सीएम का नहीं लेकिन डिप्टी सीएम का पद जरुर मिला. ये फैसला चुनाव परिणामों और बीजेपी के अंदरूनी गणनाओं का परिणाम रहा.
विधानसभा चुनाव में प्रवेश वर्मा का प्रभावशाली प्रदर्शन
विधानसभा चुनाव के दौरान, प्रवेश वर्मा ने नई दिल्ली सीट से अरविंद केजरीवाल को 4089 वोटों के अंतर से हराया था. उन्होंने 30,088 वोट प्राप्त किए, जबकि केजरीवाल को 25,999 वोट मिले. ये एक अप्रत्याशित जीत थी, जिसने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ा दिया और सीएम के पद के लिए उनके नाम को प्रबल किया.
लोकसभा चुनाव में प्रवेश वर्मा का रिकॉर्ड
प्रवेश वर्मा दो बार लोकसभा चुनाव में भी शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं. 2014 में पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने रिकॉर्ड 2,68,586 वोटों से चुनाव जीता था. इसके बाद, 2019 में उन्होंने अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ते हुए कांग्रेस के महाबल मिश्रा को 5.78 वोटों के अंतर से हराया. हालांकि, 2024 में उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं मिला और उनकी जगह कमलजीत सहरावत को पार्टी ने टिकट दिया.
विधानसभा चुनाव में उम्मीदें और सीएम की रेस
विधानसभा चुनाव में प्रवेश वर्मा को नई दिल्ली से टिकट दिया गया, जिससे उनके समर्थकों में सीएम बनने की उम्मीदें बढ़ गई थीं. हालांकि, चुनाव के दौरान उन्होंने खुद को पार्टी नेतृत्व के फैसले पर छोड़ते हुए कहा कि सीएम के चेहरे पर फैसला करना पार्टी नेतृत्व का काम है. चुनाव जीतने के बावजूद, उन्हें सीएम के पद के लिए चयनित नहीं किया गया और रेखा गुप्ता को ये जिम्मेदारी सौंपी गई.