विक्ट्री परेड पर सवाल क्यों गलत? जानें हाथरस से कैसे अलग थी मरीन ड्राइव की भीड़
Victory Parade vs Hathras Crowd: गुरुवार को देश लौटने के बाद टीम इंडिया के स्वागत में जश्न मनाया गया. मुंबई के विक्ट्री परेड करीब 3 लाख लोग जुटे और अपना धुरंधरों का हौसला अफजाई किया. इस दौरान भीड़ के कारण थोड़ी समस्याएं भी हुईं. ऐसे में कई लोग अब ये सवाल उठा रहे हैं कि हाथरस में भीड़ के कारण हादसा हुआ तो बाबा दोषी अगर मुंबई में कुछ हो जाता तो दोषी कौन होता?
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Victory Parade vs Hathras Crowd: भारत ने विश्वकप जीता तो देश में जश्न मना. हालांकि, टीम इंडिया तुरंत वतन वापसी नहीं कर पाए. ऐसे में जब भारतीय खिलाड़ी देश लौटे तो मुंबई में उनके स्वागत के लिए विक्ट्री परेड का आयोजन किया गया. इसमें करीब 3 लाख लोग शामिल हुए जो खिलाड़ियों के साथ-साथ वानखेड़े स्टेडियम तक पहुंचे. भीड़ के कारण पुलिस और प्रशासन को थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी. ऐसे में कुछ लोग ये सवाल भी उठा रहे हैं कि हाथरस हादसे में जब बाबा दोषी माना जा रहा है तो यहां कुछ होता उसकी जिम्मेदारी कैसे तय होती? आइये जाने मरीन ड्राइव और हाथरस की भीड़ में क्या अंतर था.
बता दें हाथरस में बाबा सत्संग में 80 हजार लोगों के आने की सूचना दी गई थी. हालांकि, वहां करीब 2.50 लाख लोग आए थे. वहीं मरीन मरीन ड्राइव में करीब 3 लाख लोग आए. इनके आने की संख्या का अनुमान पहले से था. इस कारण वहां भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था थी.
दोनों भीड़ में अंतर
पूर्व तैयारी- मरीन ड्राइव का कार्यक्रम एक सुनियोजित और सही ढंग के ऑर्गनाइज तरीके से किया गया कार्यक्रम था. जबकि, हाथरस में आयोजित कार्यक्रम के लिए उस तरह की तैयारी नहीं की गई थी.
पुलिस व्यवस्था- हाथरस में पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था मुंबई के मुकाबले कम थी. मुंबई में पुलिस ने पहले से वहां तैयारी की थी. उसे इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने का अनुमान था. जबकि, हाथरस में आयोजकों को इतने लोगों के आने का अनुमान नहीं था. न ही उन्होंने पुलिस को इस बारे में सूचित किया था.
लोगों में अंतर- मुंबई में खिलाड़ियों का स्वागत करने के लिए पहुंचे लोग मुंबई के या फिर देशभर से मुंबई पहुंचे हुए लोग थे. परेड के दौरान ये देखने को मिला की वहां से एक एंबुलेंस बड़ी आसानी से गुजर गई. यानी साफ है कि लोग सहयोग भावना से वहां थे. जबकि, हाथरस में भीड़ का टारगेट बाबा को देखना था.
भीड़ का अनुमान- हाथरस में आयोजकों ने पहले 80 हजार के आसपास लोगों के शामिल होने की सूचना दी थी. जबकि, आयोजन में 2.50 लाख लोग शामिल हुए. वहीं मुंबई में पहले से ही इतनी बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई थी.