भारत के लिए क्या मायने रखता है ट्रंप का 26% टैरिफ, कौन से सेक्टर होंगे प्रभावित?
US-India Trade Relations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 26% प्रतिशोधी टैरिफ से भारत के निर्यात क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है. इस कदम से कई प्रमुख उद्योग प्रभावित हो सकते हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है.

US-India Trade Relations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 26% प्रतिशोधी टैरिफ से भारत को बड़ा झटका लगा है. यह नया शुल्क भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान होने की आशंका है. यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत अमेरिका से व्यापारिक रियायतों की उम्मीद कर रहा था, लेकिन इसके बजाय नए टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है.
इस टैरिफ के लागू होने के साथ ही, 9 अप्रैल से अमेरिका में प्रवेश करने वाले सभी भारतीय उत्पादों पर न्यूनतम 26% शुल्क लगेगा. इससे भारतीय कंपनियां प्रभावित होंगी और विभिन्न उद्योगों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है. ट्रंप ने इस कदम को "व्यापार संतुलन" बनाने की दिशा में उठाया गया जरूरी कदम बताया है, जबकि भारत ने इस फैसले को व्यापारिक संबंधों के लिए झटका करार दिया है.
राष्ट्रपति ट्रंप का दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में दावा किया कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर अत्यधिक शुल्क लगाता है, जबकि अमेरिका ने वर्षों से कम शुल्क दरें रखी हैं. उन्होंने कहा, "वे (भारत) हम पर 52% शुल्क लगाते हैं, जबकि हमने दशकों तक लगभग कुछ भी चार्ज नहीं किया." अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा 46 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक यह असंतुलन बना रहेगा, तब तक ये टैरिफ जारी रहेंगे.
किन सेक्टर्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस टैरिफ का सबसे ज्यादा असर ऑटोमोबाइल, फार्मा और आईटी सेक्टर पर पड़ने वाला है. ये वो उद्योग हैं, जिनका अमेरिका में बड़ा बाजार है और जहां भारतीय कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
ऑटोमोबाइल सेक्टर को झटका
26% अतिरिक्त शुल्क से भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों पर बड़ा असर पड़ेगा. ट्रंप प्रशासन ने पहले ही 2 अप्रैल से कारों और हल्के ट्रकों पर 25% शुल्क लागू किया था, जबकि 3 मई से ऑटो पार्ट्स पर भी यह शुल्क प्रभावी हो जाएगा. विशेषज्ञों के मुताबिक, "टाटा मोटर्स, जो जगुआर लैंड रोवर (JLR) की पेरेंट कंपनी है और अमेरिका को निर्यात करती है, को इस घोषणा के बाद 5% शेयर गिरावट का सामना करना पड़ा है. वहीं, ऑटो पार्ट्स निर्माता सोना कॉमस्टार के शेयरों में भी 4% की गिरावट दर्ज की गई है."
फार्मा सेक्टर पर असर
अमेरिका भारतीय दवाओं का सबसे बड़ा बाजार है. लेकिन टैरिफ बढ़ने से भारतीय फार्मा कंपनियों को अपनी कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी. एक विशेषज्ञ ने कहा, "अभी तक फार्मा उत्पादों पर सटीक शुल्क प्रतिशत स्पष्ट नहीं हुआ है, लेकिन इतना तय है कि इससे भारतीय फार्मा निर्यातकों की आय में कमी आएगी."
आईटी उद्योग पर संभावित असर
भारतीय आईटी कंपनियों के लिए सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है. अब ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि ट्रंप प्रशासन आईटी सेवाओं पर भी टैरिफ लगा सकता है, जिससे भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई प्रभावित होगी. विशेषज्ञों का कहना है, "अगर अमेरिकी सरकार आईटी सेवाओं पर शुल्क बढ़ाती है, तो इससे भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ेगी और उनके मुनाफे पर असर पड़ेगा."
भारत के सामने चुनौतियां और संभावित कदम
भारत सरकार इस झटके को कम करने के लिए अमेरिका से बातचीत करने की कोशिश कर रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत 23 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क कम करने पर विचार कर रहा है, जिसमें रत्न, आभूषण, दवा और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं. हालांकि, अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है.
आने वाले हफ्ते इस मुद्दे के लिए निर्णायक साबित होंगे. यदि भारत ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह व्यापारिक तनाव लंबे समय तक चल सकता है, जिससे भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान हो सकता है. भारत के पास फिलहाल दो ही विकल्प हैं या तो अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क कम कर व्यापार समझौता करे, या फिर लंबे व्यापार युद्ध के लिए तैयार रहे.