पृथ्वी के सुरक्षा कवच में गड्ढा! वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता, NASA ने दी बड़ी चेतावनी

NASA के वैज्ञानिक पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में हो रहे खतरनाक बदलावों को लेकर चिंतित हैं. दक्षिण अटलांटिक विसंगति (SAA) के कारण पृथ्वी का सुरक्षा कवच कमजोर हो रहा है, जिससे अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों और अंतरिक्ष यात्रियों को खतरा हो सकता है. NASA के अनुसार, यह चुंबकीय क्षेत्र में एक 'गड्ढा' बनाता जा रहा है, जिससे स्पेसक्राफ्ट्स और सैटेलाइट्स को रेडिएशन का भारी नुकसान हो सकता है.

Deeksha Parmar
Edited By: Deeksha Parmar

पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में हो रहे बदलावों ने वैज्ञानिकों कोगहरी चिंता में डाल दिया है.NASA के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हालात हर दिन बदतर होते जा रहे हैं, जिससे न केवल अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रह और अंतरिक्ष यात्री खतरे में हैं, बल्कि पृथ्वी पर भी इसके गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकते हैं.  

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह घटना दक्षिण अटलांटिक विसंगति (SAA) के कारण हो रही है, जो दक्षिण अमेरिका से लेकर अफ्रीका तक फैली हुई है. यह क्षेत्र धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है, जिससे पृथ्वी के चुंबकीय सुरक्षा कवच मेंएक बड़ा ‘गड्ढा’ बनता जा रहा है. वैज्ञानिक इसे 160 वर्षों से मॉनिटर कर रहे हैं, लेकिन अब इसकेतेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.  

कमजोर हो रहा पृथ्वी का सुरक्षा कवच

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्रहमारे ग्रह के लिए एक ढाल का काम करता है, जो सौर हवा और ब्रह्मांडीय विकिरण से हमारी रक्षा करता है. लेकिन इस ढाल में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिससेअंतरिक्ष मिशन और सैटेलाइट्स पर गंभीर असर पड़ सकता है.

क्या है दक्षिण अटलांटिक विसंगति 

NASA के अनुसार, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में यह एकअजीबोगरीब विसंगति है, जो दक्षिण अमेरिका और दक्षिणी अटलांटिक महासागर के ऊपर पाई जाती है. इसे"मैग्नेटिक डेंट" यानीचुंबकीय गड्ढा भी कहा जा रहा है. इस क्षेत्र में चुंबकीय शक्ति इतनी कमजोर हो गई है कियहां से गुजरने वाले उपग्रहों और स्पेसक्राफ्ट्स को रेडिएशन से भारी नुकसान हो सकता है.  

हर दिन बिगड़ रहे हालात  

NASA ने स्पष्ट किया कि यह समस्या दिनों-दिनबिगड़ती जा रही है और यदि यह इसी तरह जारी रही, तो भविष्य में इसका असर पृथ्वी पर भी दिख सकता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस क्षेत्र में मौजूद रेडिएशन स्पेसक्राफ्ट और सैटेलाइट्स को प्रभावित कर सकता है, जिससेटेक्नोलॉजी पर निर्भर संचार प्रणालियों को भी खतरा हो सकता है.  

160 साल से हो रही है निगरानी  

NASA और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां पिछले160 वर्षों से इस विसंगति पर नजर रखे हुए हैं. इस दौरान यह क्षेत्र लगातार कमजोर होता जा रहा है और अबइसका विस्तार और भी तेज हो गया है.  

इस विसंगति की असली वजह क्या है?  

वैज्ञानिकों का मानना है कियह बदलाव पृथ्वी के आंतरिक कोर में हो रहे परिवर्तनों के कारण हो रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका के नीचे स्थित"अफ्रीकी लार्ज लो शियर वेलोसिटी प्रोविंस (LLSVP)" नामक एक विशाल चट्टानी संरचना पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को उत्पन्न करने वालेपिघले हुए लोहे के प्रवाह को बाधित कर रही है, जिससे यह समस्या और गंभीर होती जा रही है.  

क्या खतरे में है पृथ्वी?  

फिलहाल, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह समस्या अभी आम लोगों पर सीधा असर नहीं डाल रही, लेकिनअगर यह अनियंत्रित रही, तो इसका प्रभाव पृथ्वी के पर्यावरण और संचार प्रणाली पर पड़ सकता है. NASA और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां इस बदलाव पर लगातार अध्ययन कर रही हैं और जल्द हीइस समस्या का समाधान खोजने की दिशा में काम कर सकती हैं.  

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01 April 2025, 04:27 PM IST

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