Nepal Violence Fallout: सरकार ने पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र पर जुर्माना लगाया, उनकी सुरक्षा घटाई
नेपाल में बढ़ती हिंसा और राजशाही के पक्ष में विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर सरकार ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के खिलाफ निर्णायक कदम उठाया है. उन पर भारी जुर्माना लगाया है और उनकी सुरक्षा व्यवस्था में कटौती की है. यह कदम राज्य और शाही वफादारों के बीच चल रहे तनाव में महत्वपूर्ण वृद्धि को दर्शाता है, जिससे राजशाही के उन्मूलन के लगभग दो दशक बाद इसकी विरासत पर बहस फिर से शुरू हो गई है.

इंटरनेशनल न्यूज. नेपाल में राजशाही की वापसी की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए हैं. वे आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ कर रहे हैं. लोग नेपाल से लोकतंत्र को खत्म कर राजा को वापस लाने की मांग कर रहे हैं. इस विरोध प्रदर्शन के बाद अब सरकार ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की अपील के बाद ही नेपाली लोग विरोध प्रदर्शन के लिए उतरे हैं. काठमांडू नगर निगम ने पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र शाह को एक पत्र भेजकर एक दिन पहले राजधानी के कुछ हिस्सों में राजशाही समर्थक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति और पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की है. सुरक्षाकर्मियों और राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में एक टीवी कैमरामैन सहित दो लोग मारे गए और 110 अन्य घायल हो गए.
7,93,000 नेपाली रुपए का जुर्माना
चूंकि यह विरोध प्रदर्शन ज्ञानेंद्र शाह के आह्वान पर आयोजित किया गया था, इसलिए काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी (केएमसी) के मेयर बालेंद्र शाह ने काठमांडू के बाहरी इलाके महाराजगंज में निर्मला निवास स्थित उनके आवास पर एक पत्र भेजा, जिसमें नुकसान की भरपाई के लिए 7,93,000 नेपाली रुपये का भुगतान करने को कहा गया. पूर्व राजा को भेजे गए पत्र की प्रतियां मीडिया को जारी की गईं, जिसमें केएमसी ने कहा कि पूर्व राजा के आह्वान पर आयोजित विरोध प्रदर्शन ने महानगर की विभिन्न संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है और राजधानी के पर्यावरण को प्रभावित किया है .
देश भर में हो रहे प्रदर्शन
शुक्रवार के आंदोलन के संयोजक दुर्गा प्रसाद ने एक दिन पहले ज्ञानेंद्र शाह से मुलाकात की थी और उन्हें राजशाही और हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन शुरू करने के निर्देश मिले थे. राजशाही समर्थक काठमांडू और देश के अन्य हिस्सों में रैलियां आयोजित कर रहे हैं और 2008 में खत्म की गई 240 साल पुरानी राजशाही की बहाली की मांग कर रहे हैं.