पाकिस्तान का बड़ा फैसला, 30 लाख अफगानों को बाहर निकालने की तैयारी
पाकिस्तान 30 लाख अफगानों को निकालने की तैयारी में है. 10 अप्रैल से निर्वासन शुरू हो जाएगा और दस्तावेज रखने वालों के लिए विशिष्ट समय सीमाएं निर्धारित की जाएंगी. हालांकि पाकिस्तान की इस योजना पर तालिबान ने भी बयान जारी कर कहा है कि वो चाहता है अफगान नागरिकों की वापसी सम्मानपूर्वक हो.

पाकिस्तान सरकार इस साल अपने देश में रह रहे 30 लाख अफगानों को बाहर निकालने की योजना पर काम कर रही है. ये प्रक्रिया 2023 में शुरू हुई थी, जिसमें अवैध रूप से रह रहे अफगानों को अपनी इच्छा से पाकिस्तान छोड़ने का मौका दिया गया था. अब इस अभियान की समयसीमा समाप्त हो चुकी है, जिसके बाद निष्कासन की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है.
पहले 1 अप्रैल से अफगानों को बाहर निकाला जाना था, लेकिन ईद-उल-फ़ितर के मद्देनज़र इसे 10 अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया है. पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उनके देश में अब भी 30 लाख अफगान रह रहे हैं, जिनमें से कुछ के पास कानूनी दस्तावेज हैं, जबकि कई लोग अवैध रूप से रह रहे हैं.
पाकिस्तान सरकार का सख्त रुख
पाकिस्तान ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी में रह रहे अफगानों को 31 मार्च तक शहर छोड़ने का निर्देश दिया था. जिन अफगानों के पास पंजीकरण प्रमाणपत्र हैं, उन्हें 30 जून तक पाकिस्तान में रहने की अनुमति दी गई है. सरकार ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि जो अफगान देश छोड़ेंगे, उन्हें दोबारा वापस नहीं आने दिया जाएगा. इसके लिए पाकिस्तान विदेशी राजनयिकों के सहयोग से अफगानों के पुनर्वास की योजना पर काम कर रहा है.
इस मामले में तालिबान ने पाकिस्तान के फैसले पर आपत्ति जताई है. तालिबान के शरणार्थी मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मुतालिब हक्कानी ने कहा कि पाकिस्तान बिना तालिबान सरकार या संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी को शामिल किए हुए ये फैसला ले रहा है, जो गलत है. उन्होंने कहा कि अफगानों को एकतरफा तरीके से निष्कासित करना ना तो अफगानों के हित में है और ना ही पाकिस्तान के. इससे पाकिस्तान में अफगानों के खिलाफ नफरत बढ़ सकती है.
सम्मानजनक वापसी की मांग
तालिबान सरकार चाहती है कि अफगान शरणार्थियों की वापसी सम्मानजनक तरीके से हो. उनका कहना है कि निष्कासन के लिए एक उचित प्रक्रिया और आपसी सहमति होनी चाहिए ताकि शरणार्थी सम्मान के साथ अपने देश लौट सकें.
निष्कासन के लिए बनेगा ट्रांजिट सेंटर
- अफगानों की वापसी को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में दो ट्रांजिट स्टेशन बनाए जाएंगे.
- पहला स्टेशन पेशावर के नासिर बाग इलाके में होगा.
- दूसरा स्टेशन लांडी कोटल में स्थापित किया जाएगा, जो तोरखम क्रॉसिंग से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित है.