ट्रंप का बड़ा दांव! रूसी तेल पर भारी टैरिफ की चेतावनी, क्या भारत पर भी छाएंगे संकट के बादल?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर 25-50% सेकंडरी टैरिफ लगाने की धमकी दी, अगर एक महीने में युद्ध विराम पर सहमति नहीं बनी. इस टैरिफ से रूस ही नहीं, बल्कि भारत, चीन, तुर्किए, दक्षिण कोरिया और अन्य तेल आयातक देशों पर भी आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है.

रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध विराम को लेकर अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है. इस स्थिति को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भड़क गए हैं. उन्होंने इस संबंध में ना केवल अपनी निराशा जताई, बल्कि कड़ा रुख अपनाते हुए धमकी दी कि अगर रूस एक महीने के अंदर युद्ध विराम पर सहमत नहीं होता, तो वो मॉस्को के तेल निर्यात पर 25 से 50 फीसदी तक का अतिरिक्त सेकंडरी टैरिफ लगा देंगे. ट्रंप ने इस दौरान यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के रुख को लेकर भी आलोचना की.

ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट संकेत दिया कि अगर रूस युद्ध विराम पर सहमत नहीं होता, तो वो रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाएंगे, जिससे वैश्विक व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है. इस दौरान, उन्होंने ईरान पर हमले की भी धमकी दी और ग्रीनलैंड में सैन्य बल प्रयोग से इनकार नहीं किया.

रूस के तेल पर 25-50% सेकंडरी टैरिफ की चेतावनी

ट्रंप ने कहा कि अगर रूस और हम यूक्रेन में खून-खराबे को रोकने के लिए किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाते हैं और मुझे लगता है कि ये रूस की गलती है, तो मैं रूस से आने वाले सभी तेल पर सेकंडरी टैरिफ लगाने जा रहा हूं. इसका मतलब ये होगा कि अगर कोई भी देश रूस से तेल खरीदता है, तो वो अमेरिका के साथ व्यापार नहीं कर सकेगा. सभी तेल पर 25% से 50% तक का टैरिफ लगाया जाएगा.

किन देशों को उठाना पड़ सकता है नुकसान?

अमेरिका के इस कदम से रूस ही नहीं, बल्कि उसके तेल के प्रमुख खरीदार देश भी प्रभावित हो सकते हैं. विश्लेषकों का कहना है कि अगर ट्रंप अपनी चेतावनी को अमल में लाते हैं, तो चीन और भारत सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. इसके अलावा, तुर्किए, बुल्गारिया, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, स्लोवाकिया, हंगरी और पाकिस्तान जैसे देशों पर भी इसका असर पड़ेगा.

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जिसमें रूसी तेल की खरीद पर भी रोक शामिल थी. लेकिन भारत और चीन ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा, जिससे मॉस्को को आर्थिक राहत मिली. अब अगर अमेरिका सीधे इन खरीदारों पर सेकंडरी टैरिफ लगाता है, तो इससे पुतिन की तेल राजस्व तक पहुंच कम हो सकती है और इन देशों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ सकता है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

मल्टीनेशनल इन्वेस्टमेंट बैंक UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टानोवो ने कहा कि जिस तरह ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल के मामले में किया था, उसी तरह वो रूस के मामले में भी खरीदार देशों को लक्षित कर सकते हैं. इस कदम से चीन और भारत पर सीधा असर पड़ेगा. उन्होंने आगे कहा कि भारत अब चीन को पीछे छोड़ते हुए समुद्री रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है, इसलिए अमेरिकी टैरिफ की चिंता भारत को भी सताने लगी है.

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31 March 2025, 04:51 PM IST

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