भारत में इस साल खसरा संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। खासतौर पर महाराष्ट्र में इस संक्रमण का कहर बना हुआ है। इस राज्य में अब तक 200से ज्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है और कईबच्चों की खसरा से मौत हो चुकी है। खसरा यानी मीज़ल्स का कोई इलाज नहीं हैलेकिन इससे बचाव मुमकिन है। ऐसे में हर मां-बाप को अपने बच्चों को खसरा से बचाने के लिए बीमारी के बारे में पता होना ज़रूरी है।

पैरेंट्स को क्या पता होना चाहिए?

दरअसल जिस तरह से भारत में खसरा के मामले आ रहे हैंतो पैरेंट्स को इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। जैसे...

मीज़ल्स(खसरा) एक गंभीर बीमारी है

ज़्यादातर लोग मीज़ल्स को एक गंभीर बीमारी के रूप में नहीं लेते हैंजबकि वास्तव में मीज़ल्स एक गंभीर बीमारी है जो 5साल से कम उम्र के बच्चों को अपना शिकार बनाती है। मीज़ल्स से पीड़ित 5में से एक मरीज़ को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। इसकी वजह से दिमाग में सूजन का महसूस होती है जिससे दिमाग को नुकसान पहुंचता है।

मीज़ल्स तेज़ी से फैलता है

बता दें कि मीज़ल्स हवा के माध्यम से फैलता है। अगर इससे संक्रमित कोई  एक संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो अपने आसपास के 9से 10लोगों को संक्रमित कर सकता है। यहां तक कि आपके बच्चे को केवल उस कमरे में रहने से खसरा हो सकता है जहां खसरे से पीड़ित व्यक्ति रहा हो।

ये है मीज़ल्स से बचने का उपाय

मीज़ल्स से बच्चों को बचाने का बेस्ट तरीका है MMR (मीज़ल्स, मम्प्स-रूबला) वैक्सीन लगवाना। ये वैक्सीन बच्चों को लंबे समय तक मीज़ल्स के सभी स्ट्रेन्स से बचा कर रखती है।

इसके लिए बच्चों को MMR वैक्सीन की दो डोज़ चाहिए-

  • पहली डोज़ 12से 15महीने की उम्र तक लगती है।
  • दूसरी डोज़ 4से 6साल की उम्र के बीच लगनी चाहिए।