पलक झपकते ही आप पकड़ लेंगे सामने वाला झूठ बोल रहा है या नहीं? अपनाकर देखें ये नया तरीका
हममें से अधिकांश लोग यह नहीं समझ पाते कि सामने वाला कब और क्या झूठ बोल रहा है, लेकिन क्या हो अगर आप केवल उसके आंख झपकाने से यह जान सकें कि वह सच बोल रहा है या झूठ? आइए, जानते हैं कैसे.

झूठ बोलना एक कला मानी जाती है, लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि इसे पूरी तरह से छिपाना असंभव है. हालांकि, कुछ लोग इतने कुशल होते हैं कि वे झूठ इतनी सफाई से बोलते हैं कि यह पहचान पाना मुश्किल हो जाता है.
पहले के समय में, चेहरे के हाव-भाव, घबराहट और पसीने को देख कर यह अनुमान लगाया जाता था कि व्यक्ति सच बोल रहा है या नहीं. हालांकि, इससे यह पुष्टि नहीं हो पाती थी. इसके बाद झूठ पकड़ने के लिए पॉलिग्राफ मशीनों का उपयोग किया गया, लेकिन चालाक दिमाग ने इन्हें भी चकमा देना सीख लिया.
छोटी-छोटी हरकतों से झूठ पहचानें
अब विज्ञान और तकनीक ने इस दिशा में और भी तरकीबें विकसित की हैं, जिससे झूठ बोलने वाले को पकड़ना काफी आसान हो गया है. चाहे वह कितना भी सफाई से क्यों न बोले, अब ऐसे तरीके मौजूद हैं, जिनसे झूठ पकड़ा जा सकता है. अब क्या हो अगर आप किसी व्यक्ति की कुछ छोटी-छोटी हरकतों से ही उसके झूठ को पहचान लें? जी हां, एक नई रिसर्च के अनुसार, हमारी आंखें और आवाज़ झूठ पकड़ने में मदद कर सकती हैं.
एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग झूठ बोलते हैं, उनकी आवाज़ सामान्य से तेज हो जाती है. साथ ही, उनकी आवाज़ में हल्का सा कंपन भी सुनाई दे सकता है और उनकी बोलने की गति भी बदल जाती है.
एक अन्य रिसर्च में यह पाया गया कि जब कोई व्यक्ति झूठ बोलता है, तो उसकी आंखों की पुतलियाँ फैल जाती हैं. वालेंटिन फॉशर और एंके हुकॉफ द्वारा की गई एक स्टडी में यह साबित हुआ कि झूठ बोलते वक्त पुतलियाँ अधिक फैलती हैं, क्योंकि दिमागी प्रक्रिया में अधिक मेहनत लगती है.
झूठ पकड़ने का एक नया तरीका
इसके अलावा, एक और रिसर्च में यह सुझाव दिया गया कि अगर किसी व्यक्ति को उसकी मातृभाषा की बजाय किसी दूसरी भाषा में झूठ बोलने के लिए कहा जाए, तो यह झूठ पकड़ने का एक नया तरीका हो सकता है. एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि जो लोग झूठ बोलते हैं, वे उसे सच साबित करने के लिए जरूरत से ज्यादा बोलने लगते हैं.