वसंत पंचमी का उत्सव काफी पवित्र माना जाता है । यह साल में एक बार मनाया जाता है साथ ही इस दिन माता सरस्वती और ब्रम्हा की पूजा सच्चे मन से की जाती है।कहा जाता है कि इसी दिन माता सरस्वती की उत्पति भगवान ब्रम्हा के द्वारा की गई थी । तभी से हर साल यह उत्सव मानाया जाने लगा ।यही कारण है कि इस दिन माता सरस्वती की आराधना की जाती है । शास्त्रो के अनुसार इस दिन की एक और कहानी मानी जाती है ।

बताया जाता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने माता सरस्वती को वरदान दिया था कि वंसत पंचमी के दिन सभी स्थानों पर सभी व्यक्ति उनकी आराधना करेंगे। उसके बाद से ही यह उत्सव लोग बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाते हैं । साथ ही इसी दिन माता सरस्वती की पूजा करके उनको खुश करने की हर प्रकार की कोशिश की जाती हैं ।

सरस्वती माता को क्यों कहा जाता है ज्ञान की देवी ?

माना जाता है कि वसंत ऋतु को सभी ऋतुओं का राजा माना गया है जब सभी ऋतुएं अपने क्रम में आती है तो शीत ऋतु का समापन किया जाता है तभी वसंत ऋतु का आगमन होता है । यह हर साल माघ मास की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है । मान्यता है कि सृष्टि के रचियता भगवान ब्रम्हा के मुख से वंसत पंचमी के दिन ही ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती का प्रकाट्य हुआ था इसी कारण सभी लोग इस दिन माता सरस्वती की आराधना करते हैं ताकि व्यक्तियों को ज्ञान की प्राप्ति हो सके ।

एक और कथा

वसंत पंचमी को लेकर एक और कथा बताई गई है कहा जाता है कि यह कथा कालिदास से जुड़ी है ।कालिदास जी को जब उनकी पत्नी ने त्याग दिया था तो उनसे दुखी होकर उन्होंने आत्महत्या करने के बारे में सोच लिया वह ऐसा करने ही जाते हैं कि देवी सरस्वती नदी के जल से बाहर आईं और कालिदास को स्नान करने को कहा उसके बाद से ही कालिदास जी का जीवन बादल गया और वह माता सरस्वती की कृपा से काफी ज्ञानी बन गए।