Chaitra Navratri 2025: जानिए कब मनाए जाएंगे रामनवमी, सप्तमी, अष्टमी और एकादशी व्रत
इस साल चैत्र नवरात्रि आठ दिन की होगी, जिसमें कई महत्वपूर्ण तिथियां जैसे राम नवमी और एकादशी व्रत मनाए जाएंगे. नवरात्रि के दौरान हर दिन की पूजा विधि अलग होगी, जैसे पंचमी तिथि पर लक्ष्मी और नाग पूजा, षष्ठी तिथि पर स्कंद पूजा, अष्टमी तिथि पर दुर्गाष्टमी पूजा और रामनवमी पर कन्या पूजन.

इस साल चैत्र नवरात्रि का आयोजन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस बार तिथि का क्षय होने के कारण नवरात्रि आठ दिन की हो रही हैं. चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में ये व्रत पूरे देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और विशेष अवसरों पर उपवास, व्रत और पूजन विधि का पालन किया जाता है. 2025 में चैत्र नवरात्रि के दौरान कई महत्वपूर्ण तिथियां, जैसे राम नवमी और एकादशी व्रत भी मनाए जाएंगे. इस आर्टिकल में हम आपको चैत्र नवरात्रि के महत्वपूर्ण व्रतों और तिथियों की जानकारी देने जा रहे हैं.
चैत्र नवरात्रि के प्रमुख व्रत और तिथियां
चैत्र शुक्ल चतुर्थी तिथि (1 अप्रैल):
इस दिन चतुर्थी तिथि मनाई जाती है और इसे विशेष रूप से दमनक चतुर्थी के रूप में पूजा जाता है. भद्रासंयुक्त समय में पूजा का महत्व बढ़ जाता है.
चैत्र शुक्ल पंचमी तिथि (2 अप्रैल):
ये दिन श्री (लक्ष्मी) पंचमी और नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन हय व्रत का आयोजन भी होता है और संतान सुख की प्राप्ति के लिए विशेष पूजा की जाती है.
चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि (3 अप्रैल):
इस दिन स्कंद षष्ठी व्रत का आयोजन किया जाता है. खासकर संतान सुख के लिए ये व्रत महत्वपूर्ण है और भक्त विशेष रूप से भगवान स्कंद की पूजा करते हैं.
चैत्र शुक्ल सप्तमी तिथि (4 अप्रैल):
सप्तमी तिथि पर भद्रासंयुक्त पूजा की जाती है. इस दिन सप्तमी व्रत के साथ-साथ माता दुर्गा की उपासना की जाती है.
चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि (5 अप्रैल):
अष्टमी तिथि पर श्री दुर्गाष्टमी की पूजा होती है. इस दिन दुर्गा मां की विशेष पूजा और अन्नपूर्णा पूजन भी किया जाता है.
चैत्र शुक्ल नवमी तिथि (6 अप्रैल):
नवमी तिथि पर श्री रामनवमी का आयोजन होता है, जो इस साल रवि-पुष्य योग में मनाई जाएगी. रामनवमी के दिन कन्या पूजन का महत्व है और नवरात्रि का समापन भी इसी दिन होता है.
चैत्र शुक्ल दशमी तिथि (7 अप्रैल):
दशमी तिथि पर नवरात्र व्रत का पारणा किया जाता है और इस दिन गंडमूल भी मनाया जाता है.
चैत्र शुक्ल एकादशी तिथि (8 अप्रैल):
इस दिन विशेष रूप से कामदा एकादशी व्रत रखा जाएगा, जिसमें भक्त उपवासी रहते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं.
कामदा एकादशी व्रत का पारण (9 अप्रैल):
कामदा एकादशी का पारण 9 अप्रैल को सुबह 06:02 बजे से लेकर 08:34 बजे तक किया जाएगा, जो द्वादशी समाप्त होने तक चलता रहेगा.
नवरात्रि में क्या करें और कब करें पूजा
पंचमी तिथि (2 अप्रैल) पर लक्ष्मी और नाग पूजा: इस दिन मां लक्ष्मी और नाग देवता की पूजा विशेष रूप से समृद्धि और सुख के लिए की जाती है.
षष्ठी तिथि (3 अप्रैल) पर स्कंद पूजा: संतान सुख प्राप्ति के लिए इस दिन स्कंद पूजा का विशेष महत्व होता है.
अष्टमी तिथि (5 अप्रैल) पर दुर्गाष्टमी पूजा: इस दिन मां दुर्गा की पूजा विशेष रूप से उनकी शक्ति की प्राप्ति के लिए की जाती है.
रामनवमी (6 अप्रैल) पर कन्या पूजन: इस दिन भगवान राम के साथ-साथ कन्या पूजन की विशेष परंपरा होती है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है.