Garuda Purana: मृत्यु जीवन का अटल सत्य है, जिसे हर व्यक्ति को स्वीकार करना होता है. पवित्र ग्रंथ गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा और उसके कर्मों के आधार पर मिलने वाले फल का विस्तार से वर्णन किया गया है. इसमें यह भी बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक पहुंचने में कितना समय लगता है और इस यात्रा के दौरान उसे किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक तक पहुंचने में 47 दिन लगते हैं. इन दिनों के दौरान आत्मा को कई कठिन मार्गों से गुजरना पड़ता है, जो उसके जीवन में किए गए कर्मों पर निर्भर करता है.
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु से ठीक पहले व्यक्ति की आवाज चली जाती है और उसे दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है. वह पूरे संसार को एक रूप में देखने लगता है, और उसकी सभी इंद्रियां धीरे-धीरे निष्क्रिय हो जाती हैं. मृत्यु के बाद यमदूत आत्मा के गले में पाश डालकर उसे यमलोक की ओर ले जाते हैं. अगर व्यक्ति ने पाप किए हों, तो उसे अंधेरे और गर्म रास्तों से यातनाएं सहते हुए ले जाया जाता है.
मृत्यु के बाद आत्मा 13 दिनों तक अपने परिवार के पास रहती है. इस दौरान वह अपने अंतिम संस्कार की सभी रस्मों और तेरहवीं का अनुभव करती है. गरुड़ पुराण के अनुसार, पिंडदान और तेरहवीं आत्मा को यमलोक की यात्रा में ऊर्जा प्रदान करती है. इसलिए हिंदू धर्म में इन रस्मों को महत्वपूर्ण माना गया है.
यमलोक की यात्रा में आत्मा को वैतरणी नदी पार करनी पड़ती है. यह नदी लाल रंग की होती है और इसमें आग की लपटें उठती रहती हैं. अगर व्यक्ति ने जीवन में गौदान या अन्य पुण्य कर्म किए हों, तो वह गाय की पूंछ पकड़कर इस नदी को आसानी से पार कर लेता है.
वैतरणी नदी पार करने के बाद आत्मा यमलोक पहुंचती है. यहां यमराज उसके जीवन के कर्मों का लेखा-जोखा करते हैं. अच्छे कर्म करने वाली आत्मा को स्वर्ग में और बुरे कर्म करने वाली आत्मा को नरक में भेजा जाता है. गरुड़ पुराण यह शिक्षा देता है कि जीवन में हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए, क्योंकि मृत्यु के बाद केवल कर्म ही हमारे साथ जाते हैं और वही हमारे भविष्य का निर्धारण करते हैं. First Updated : Friday, 29 November 2024