मां दुर्गा का ऐसा मंदिर जहां औरंगजेब ने टेका था माथा, पढ़ें चमत्कारी घटना

Navratri 2025: नवरात्रि के इस पावन अवसर पर हम आपको जीण माता के चमत्कारी मंदिर की कहानी बता रहे हैं, जो राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है. इस मंदिर का धार्मिक महत्त्व ही नहीं, बल्कि यह एक ऐतिहासिक घटना का गवाह भी रहा है. इतिहास में यह चर्चित है कि जब मुगल बादशाह औरंगजेब ने इस मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया. तो चलिए कहानी जानते हैं.

Deeksha Parmar
Edited By: Deeksha Parmar

Navratri 2025: नवरात्रि के इस पावन अवसर पर हम आपको एक ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो न सिर्फ धार्मिक महत्त्व रखता है, बल्कि एक ऐतिहासिक घटना का भी गवाह रहा है. यह मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है, जहां एक बार मुगल बादशाह औरंगजेब की सेना को मात खानी पड़ी थी. जी हां, हम बात कर रहे हैं जीण माता के मंदिर की, जहां औरंगजेब के सैनिकों को मां के चमत्कारी आशीर्वाद से भागना पड़ा था.

यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसके साथ जुड़ी हुई एक अद्भुत घटना इतिहास में दर्ज है, जिसने इस स्थान को और भी महत्व दे दिया. जानिए इस मंदिर और यहां की चमत्कारी शक्तियों के बारे में विस्तार से.

जीण माता का चमत्कारी मंदिर

जीण माता का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के अरावली पर्वत मालाओं के बीच स्थित है. यह प्राचीन शक्तिपीठ है और यहां की मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मां जीण के दरबार में शीश नवाता है, उसकी सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं. हर साल यहां चैत्र शुक्ल नवरात्रि में एक भव्य लक्खी मेला आयोजित होता है, जहां दूर-दूर से भक्त अपनी श्रद्धा अर्पित करने आते हैं.

औरंगजेब की सेना पर हुआ मधुमक्खियों का हमला

यहां एक ऐतिहासिक घटना भी घटी थी, जिसे सुनकर कोई भी चौंक सकता है. औरंगजेब के शासनकाल में उसने इस मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था. उसकी सेना जब मंदिर की ओर बढ़ी, तो वहां मौजूद भक्तों ने मां जीण से उनकी रक्षा की गुहार लगाई. तभी हुआ कुछ ऐसा, जो किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. मंदिर के पास पहुंचते ही औरंगजेब की सेना पर मधुमक्खियों का भयंकर हमला हो गया. सेना के लोग डरकर जान बचाकर वहां से भाग खड़े हुए. यह दृश्य एक चमत्कारी घटना जैसा था, जिसने सेना की सारी योजना को नाकाम कर दिया.

औरंगजेब ने मां जीण से मांगी माफी

मुगल साम्राज्य के शक्तिशाली बादशाह औरंगजेब ने जब देखा कि उसकी सेना को इतनी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा है, तो उसने समझ लिया कि यह सब माता जीण के आशीर्वाद से हुआ है. औरंगजेब ने तत्काल अपनी सेना को पीछे हटाने का आदेश दिया और फिर माता जीण से क्षमा मांगी. उसने यहां चांदी का छत्र चढ़ाकर मां के सामने अपना सिर झुका दिया. इस घटना ने इस मंदिर को न केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध किया, बल्कि यह इतिहास में एक अद्भुत चमत्कारी स्थान बन गया.

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01 April 2025, 02:59 PM IST

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