मध्य प्रदेश। देश में आए दिन सड़क हादसा होने पर मौके पर तमाशबीनों की भीड़ लग जाती है, और लोग मोबाइल फोन से घटना का वीडियो बनाना शुरू कर देते हैं। इसी वजह से घायल व्यक्ति को समय पर उपचार नहीं मिल पाता, जिसके चलते कई लोगों की मौत भी हो जाती है। इसके अलावा पुलिस के रूखे व्यवहार के कारण भी लोग कानूनी पचड़े में फंसने से डरते हैं और पीड़ित की मदद करने से कतराते हैं।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने गुड सेमेरिटन योजना की शुरूआत की है। इसके तहत ऐसे व्यक्ति जिनके द्वारा किसी घायल को अस्पताल पहुंचाने पर जान बचाते हैं, उन्हें सरकार की तरफ से पांच हजार रुपए की राशि ईनाम के तौर पर दी जाएगी।

पुलिस परेशान नहीं कर सकती -

सेवानिवृत्त एएसपी लल्ली ने बताया कि अधिकतर मामले में लोग पुलिस के पचड़े में फंसने के डर से घायल व्यक्ति की मदद करने से कतराते हैं। कई बार लड़ाई-झगड़े के मामले में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले पर ही हत्या जैसे संगीन अपराध का दोष मढ़ने की कोशिश की जाती है।

इस तरह के मामले पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है। इसमें घायलों की मदद करने वाले व्यक्ति को परेशान नहीं करने को कहा गया है। उसकी मर्जी के बिना पुलिस उसे गवाह भी नहीं बना सकती। इसके बाद भी पीड़ितों की मदद करने वालों के प्रति पुलिस का व्यवहार नहीं बदला है।

ज्यादा भीड़ के कारण मदद करने से बचते हैं लोग -

शहर के प्रसिद्ध मनोविज्ञानी डा. वैभव दुबे बताते हैं कि कोई भी हादसा होने पर घटना स्थल पर स्वाभाविक रूप से भीड़ जमा होने लगती है। लोग घटना की वीडियो बनाने लगते हैं, लेकिन घायल की मदद को आगे नहीं बढ़ते हैं। दरअसल लोगों की संख्या अधिक होने पर मदद की जिम्मेदारी का भाव बंट जाता है।

सभी के मन में किसी न किसी के द्वारा पीड़ित की मदद के आगे बढ़ने का भाव जाग जाता है। जिसके चलते कोई भी आगे नहीं बढ़ता। इसके विपरीत यदि एक-दो लोग ही मौके पर मौजूद होते हैं, तो उनके द्वारा पीड़ित की मदद अवश्य की जाती है।