'चमोली की बर्फीली तबाही: 54 मजदूर दबे, रेस्क्यू ऑपरेशन में जारी है जिंदगी की तलाश!'
चमोली के माणा गांव में हुए एवलांच ने भारी तबाही मचाई. कई मजदूर बर्फ में दब गए, रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और हेलीकॉप्टर से बचाव कार्य हुआ. लेकिन इस हादसे में कितनों की जान बची और कितनों को खो दिया गया? जानिए इस खौफनाक मंजर की पूरी कहानी…

Chamoli Avalanche Tragedy: उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार को अचानक आई बर्फीली तबाही (हिमस्खलन) ने तबाही मचा दी. बदरीनाथ के पास माणा गांव में हुए इस एवलांच में 54 मजदूर बर्फ के नीचे दब गए थे. राहत और बचाव कार्य के बाद 50 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन 8 मजदूरों की जान नहीं बचाई जा सकी.
रविवार को 4 और शव बरामद, कुल मौतें हुईं 8
शनिवार तक 50 मजदूरों को बचा लिया गया था, जिनमें से 4 की इलाज के दौरान मौत हो गई थी. रविवार सुबह फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया, जिसमें खोजी कुत्तों और हेलीकॉप्टरों की मदद से 4 और शव बरामद किए गए. इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 8 हो गई.
एयरफोर्स और आर्मी का बड़ा बचाव अभियान
बचाव अभियान में भारतीय वायुसेना के Mi-17 और चीता हेलीकॉप्टरों को तैनात किया गया था. सेना के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी स्निफर डॉग्स की मदद से रेस्क्यू में जुटी रहीं. जोशीमठ में मौजूद जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि बचाव कार्य सुबह 7 बजे शुरू किया गया और अब यह पूरा हो चुका है.
मुख्यमंत्री धामी ने लिया हालात का जायजा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में बिजली, संचार और अन्य जरूरी सुविधाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के निर्देश दिए.
#WATCH | माणा (चमोली) हिमस्खलन की घटना | चमोली DM संदीप तिवारी ने कहा, "आज शाम 5:30 बजे तक अभियान पूरा हो गया है, 54 BRO कर्मी जो वहां फंसे थे उनमें से 46 को सकुशल निकाला गया है। 8 लोगों की मृत्यु हुई है। इस अभियान में केंद्र और राज्य सरकार का पूरा समर्थन हमें मिला... सेना, ITBP,… pic.twitter.com/nALKREOKvT
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 2, 2025
भारत-चीन बॉर्डर के पास हुआ हादसा
माणा गांव, जो भारत-चीन सीमा के पास स्थित है, वहां करीब 3,200 मीटर की ऊंचाई पर बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के मजदूर आठ कंटेनरों में रह रहे थे. हिमस्खलन के कारण यह मजदूर बर्फ के नीचे दब गए. पहले मजदूरों की संख्या 55 बताई जा रही थी, लेकिन बाद में पता चला कि एक मजदूर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा अपने घर चला गया था, जिससे यह संख्या 54 हो गई.
आखिरी दम तक चली तलाश, अब ऑपरेशन पूरा
बचाव दल ने खोजी कुत्तों, ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) और थर्मल इमेजिंग कैमरों की मदद से लापता मजदूरों को ढूंढने की पूरी कोशिश की. अब अधिकारियों ने पुष्टि कर दी है कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो चुका है और सभी लापता मजदूरों की स्थिति साफ हो गई है. यह हादसा एक बार फिर हमें पहाड़ों में रहने वाले लोगों और वहां काम करने वाले मजदूरों की कठिनाइयों की याद दिलाता है. प्रशासन ने जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए और बेहतर तैयारियां की जा सकें.