उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित श्री बद्रीनाथ धाम के द्वार 27 अप्रैल को खुलेंगे। सुबह 7:10 बजे बद्रीनाथ के कपाट खोले जाएंगे। जबकि जाडू घड़ा तेल यात्रा 12 अप्रैल से शुरू होना निश्चित हुआ है। बसंत पंचमी के अवसर पर ये घोषणा की गई। घोषणा के दौरान बद्रीनाथ मंदिर समिति के पदाधिकारी और पंडित मौजूद थे। जोशीमठ में दरारों के बाद, बद्रीनाथ में दरारें आने के बाद यात्रा पर कई सवाल उठने लगे थे। इसी दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐलान किया है कि बद्रीनाथ यात्रा सही समय पर शुरू होगी। जोशीमठ को बद्रीनाथ से जोड़ने वाले पुल पर भी दरारें पहुँच गई हैं। यह पल जोशीमठ की तलहटी में अलकनंदा नदी के ऊपर बना हुआ है। यहाँ तक दरारें दिखने से लोग आशंकित हैं। यही पुल जोशीमठ को धार्मिक स्थल हेमकुंट साहिब और फूलों की घाटी से भी जोड़ता है। ऐसे में धार्मिक यात्रा के हिसाब से यह पुल काफी महत्वपूर्ण है।

अधिकारी ने कहा कि ये कहना मुश्किल है की दरारें नई है या पुरानी। इसके लिए जांच टीम ने दरारों के बीच लकड़ी फंसाई है ताकि यह पता लगाया जा सके की दरारें और तो नहीं बढ़ रहीं। इस पर लगातार जाँच एजेंसियां नज़र रखे हुई हैं और जोशीमठ की आठ स्पेशल टीमें भी इस पर नज़र बनाये हुए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जोशीमठ में 70 फीसदी दुकाने खुली हुई हैं। लोगों का आना जाना भी जारी है। इस बार बद्रीनाथ की यात्रा जोशीमठ से ही की जाएगी। जोशीमठ सरकार द्वारा सभी प्रबंध किए जा रहे हैं और एनडीआरएफ टीम भी मौके पर मौजूद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इसके हालात पर नज़र बनाये हुए हैं।

बद्रीनाथ मन्दिर में हिंदू धर्म के देवता विष्णु के एक रूप "बद्रीनारायण" की पूजा होती है। यहाँ उनकी (3.3 फीट) लंबी शालिग्राम से निर्मित मूर्ति है जिसके बारे में मान्यता है कि इसे आदि शंकराचार्य ने 8 वीं शताब्दी में समीपस्थ नारद कुण्ड से निकालकर स्थापित किया था।