Haryana Election: क्या कांग्रेस के वादे बनेंगे जनहित या है सिर्फ एक दिखावा?

Haryana Election: हरियाणा के चुनावी मैदान में कांग्रेस और बीजेपी की जोरदार टक्कर देखने को मिल रही है. कांग्रेस ने 7 गारंटियों का दमदार वादा किया है, वहीं बीजेपी ने 20 सूत्री संकल्प पत्र के साथ जवाब दिया है. लेकिन क्या ये वादे वास्तव में जनता के हित में साबित होंगे या सिर्फ चुनावी हथकंडे हैं? पिछले अनुभवों को देखते हुए, क्या हरियाणा में एक बार फिर कांग्रेस के वादों का भरोसा किया जा सकेगा या बीजेपी की योजनाएं जीत जाएंगी? जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर!

JBT Desk
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Haryana Election: हरियाणा में चुनावी महौल सज चुका है और इस बार कांग्रेस और बीजेपी की टक्कर बेहद दिलचस्प नजर आ रही है. दोनों पार्टियों ने अपने-अपने वादों के साथ जनता को लुभाने की कोशिश की है. कांग्रेस ने 7 गारंटियों का ऐलान किया है जबकि बीजेपी ने 20 सूत्री संकल्प पत्र जारी किया है. ये वादे केवल चुनावी रणनीति नहीं बल्कि हरियाणा की जनता के भविष्य का निर्धारण कर सकते हैं.

कांग्रेस की 7 गारंटियां

कांग्रेस ने अपने वादों में महिलाओं को हर महीने 2,000 रुपए का भत्ता देने, 300 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने और 25 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज करवाने का वादा किया है. पार्टी ने ये गारंटियां कर्नाटक और तेलंगाना में सफल अनुभवों के आधार पर दी हैं. कांग्रेस का मानना है कि हरियाणा में इन वादों के जरिए वे सत्ता में वापसी कर सकती हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या ये वादे वित्तीय रूप से व्यवहारिक हैं?

बीजेपी का 20 सूत्री संकल्प पत्र

दूसरी ओर बीजेपी ने भी अपने वादों में कोई कमी नहीं रखी है. पार्टी ने महिलाओं के लिए लाडो लक्ष्मी योजना के तहत 2,100 रुपए देने, गृहिणी योजना के तहत 500 रुपए में एलपीजी सिलेंडर देने और बालिकाओं को कॉलेज जाने के लिए स्कूटर देने का वादा किया है. बीजेपी का ये मानना है कि वे अपने पिछले कार्यकाल में किए गए वादों को सफलतापूर्वक लागू कर चुकी हैं, जिससे जनता में उनका विश्वास बढ़ा है.

मुफ्त योजनाओं का असली मतलब

चुनाव के समय मुफ्त योजनाओं का वादा करना आम बात है लेकिन ये देखना जरूरी है कि कौन से वादे वास्तविकता में लागू हो सकते हैं. कांग्रेस की कई योजनाएं, जैसे हिमाचल में पुरानी पेंशन योजना का वादा, अब जनता के लिए समस्या बन चुकी हैं. वहां के कर्मचारियों को वेतन और पेंशन की दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं. इसी तरह कर्नाटक में भी कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कई मंत्री अब इन वादों को लागू करने में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं.

क्या कांग्रेस के वादों पर विश्वास किया जा सकता है?

कांग्रेस ने किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी देने का वादा किया है, जबकि जब वह सत्ता में थी तब इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था. युवाओं के लिए 2 लाख पक्की नौकरियों का वादा भी इस संदर्भ में संदेहास्पद लगता है खासकर जब हम पुरानी हुड्डा सरकार के कार्यकाल को याद करते हैं. कांग्रेस के वादों पर अब जनता का विश्वास कम होता जा रहा है. उदाहरण के लिए, राहुल गांधी ने पिछले चुनावों में महिलाओं को 8,000 रुपए देने का वादा किया था लेकिन उस पर जनता ने भरोसा नहीं किया.

बीजेपी का भरोसा

वहीं अगर बीजेपी के भरोसे की बात करे तो बीजेपी के वादों के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी होती है, जिससे जनता को एक विश्वास मिलता है. पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में जो योजनाएं पेश की हैं उनके पीछे एक ठोस योजना है और ये वित्तीय दृष्टिकोण से अधिक यथार्थवादी दिखती हैं.

हरियाणा के आगामी चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी के वादों का खेल स्पष्ट है. जनता को समझना होगा कि कौन से वादे सच्चाई में बदलेंगे और कौन से केवल चुनावी हथकंडे हैं. ये चुनाव हरियाणा के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इन वादों का असर आने वाले 5 सालों में देखने को मिलेगा.

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23 September 2024, 12:22 PM IST

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