हाल ही में हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट सामने आई है कि जिसके मुताबिक अडानी ग्रुप यूएस ट्रेडेड बॉन्ड्स, नॉन-इंडियन बेस्ड डेरिवेटिव्स और नॉन-इंडियन ट्रेडेड रेफरेंस सिक्योरिटीज के जरिए कंपनियों की शॉर्ट सेलिंग कर रहे हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद तेलंगाना के आईटी और उद्योग मंत्री के टी रामाराव ने प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो को अडानी ग्रुप की जांच करने की चुनौती दे डाली।

टी रामाराव ने पूछा है कि "क्या प्रवर्तन निदेशालय या केंद्रीय जांच ब्यूरो या अन्य केंद्रीय एजेंसियों में अडानी समूह द्वारा कथित स्टॉक हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी की जांच करने का साहस है। ईडी, सीबीआई, आईटी और सेबी हैं दम जांच करने का ?? मुझे यकीन है कि कोई भी मुख्यधारा का राष्ट्रीय मीडिया इस पर रिपोर्ट/चर्चा नहीं करेगा और यहां तक ​​कि एनपीए सरकार द्वारा रिपोर्ट को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी दबाव डाला जाएगा।"

हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि, "अडानी समूह दशकों से एक खुले स्टॉक हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी योजना में शामिल है राष्ट्रीय मीडिया इस रिपोर्ट पर चर्चा तक नहीं करेगा और यहां तक ​​कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी इस पर चर्चा करेंगे। न्यूयॉर्क स्थित फोरेंसिक वित्तीय अनुसंधान फर्म द्वारा रिपोर्ट को हटाने के लिए एनपीए सरकार द्वारा दबाव डाला गया।"

हिंडनबर्ग रिसर्च ने बुधवार को दो साल की जांच के निष्कर्षों का खुलासा किया कि "अडानी ग्रुप की सात कंपनियों ने ओवर वैल्यू दिखाई है बता दें, अडानी ग्रुप की 7 कंपनियां जो शेयर बाजार में लिस्टिड है उन्होंने 85 फीसदी से ज्यादा ओवर वैल्यू दिखाई है। हिंडनबर्ग ने कहा, शोध में अदानी समूह के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों सहित दर्जनों व्यक्तियों के साथ बात करनी है और हजारों दस्तावेजों की समीक्षा करनी।"