भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्य़क्ष बृजभूषण शरण ने दिल्ली हाई कोर्ट का रूख करते प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों पर आरोप लगाया है। पहलवानों ने न्याय का मजाक बनाकर यौन उत्पीड़न कानूनों का पूरी तरह से दुरुप्रयोग किया है। अगर किसी खिलाड़ी का यौन उत्पीड़न हुआ तो उसे पुलिस और अदालतों के माध्यम से कानून के अनुसार अपनी बात रखनी चाहिए।

बृजभूषण शरण सिंह ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर सोमवार को किए गए एक ट्वीट में कहा गया कि "मेरे या मुझसे सम्बद्ध किसी अधिकृत व्यक्ति द्वारा दिल्ली सरकार, धरना देने वाले पहलवानों और न्यूज़ चैनलों के विरुद्ध कोई याचिका प्रस्तुत नहीं की गई है। मैंने किसी अधिवक्ता, लॉ एजेंसी या प्रतिनिधि को किसी न्यायालय में याचिका प्रस्तुत करने की अनुमति या अधिकार प्रदान नहीं किया है। अतः मीडिया के सभी माध्यमों से आग्रह है कि कोई भी अपुष्ट और अप्रमाणिक ख़बर प्रसारित न करें। वर्तमान समय में विषय की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए सभी से अनुरोध है कि किसी अफवाह या भ्रमात्मक तथ्यों को बढ़ावा देकर अव्यवस्था न बढ़ावें।"

आपको बता दें कि कि याचिका में दावा किया गया है कि 18 जनवरी को 6 पहलवानों नें गोड़ा के चैंपयनशिप को छोड़कर दिल्ली के जंतर मंतर पर इकठ्ठा हुए थे। बृजभूषण शरण शिंह का इस्तीफा पाने के उद्देश्य से विरोध करना शुरु कर दिया। यह भी दावा किया गया है कि कानूनी नक्सवाद का आरोप लगाकर शुरू किया गया था

केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि WFI के अध्यक्ष अपने पद पर काम नहीं करेंगे। हम विश्व चैंपियन मैरी कॉम की अध्यक्षता में ओवरसाइट कमेटी बना रहे हैं जिसमें ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त, द्रोणाचार्य पुरस्कृत तृप्ति मुरगुंडे, TOPS CEO राजगोपालन, राधा श्रीमन इसके सदस्य होंगे।