भारत का पहला प्रमुख किसान आंदोलन नील विद्रोह था जो साल 1859 में शुरू हुआ था और 1860 में खत्म हुआ था.
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चंपारण सत्याग्रह
भारत में दूसरा किसान आंदोलन चंपारण सत्याग्रह था जो महात्मा गांधी के नेतृत्व में साल 1917 में हुआ था.
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खेड़ा सत्याग्रह
सन् 1917 ई. में गुजरात जिले की पूरे साल की फसल मारी गई लेकिन सरकार ने लगान माफ नहीं किया. किसानों ने सरकार से गुहार लगाई लेकिन उनकी बातें नहीं मानी गईं तो महात्मा गांधी ने उन्हें सत्याग्रह करने की सलाह दी.
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बिजोलिया किसान आंदोलन
बिजोलिया किसान आंदोलन किसानों पर अत्यधिक लगान लगाए जाने के ख़िलाफ़ किया गया था। यह आंदोलन 1897-1941 तक चला। इसे भारत का पहला अहिंसक किसान आंदोलन माना जाता है.
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बेगूं किसान आंदोलन
बेगूं किसान आंदोलन जो साल 1921 में चित्तौड़गढ़ में शुरु हुई थी. इस आंदोलन की शुरूआत रामनारायण चैधरी ने की, बाद में इसकी बागड़ोर विजयसिंह पथिक ने सम्भाली थी.
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उत्तर प्रदेश किसान आंदोलन
उत्तर प्रदेश के हरदोई, बहराइच एवं सीतापुर जिलों में लगान में वृद्धि एवं उपज के रूप में लगान वसूली को लेकर अवध के किसानों ने 'एका आंदोलन' नामक आंदोलन चलाया.
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तेलंगाना आंदोलन
साल 1946 से1951 के बीच तेलंगाना किसान सशस्त्र संघर्ष हुआ था जिसका उद्देश्य किसानों को सामंती उत्पीड़न से मुक्त कराना और भूमि पुनर्वितरण के लिए लड़ना था.
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तेभागा आन्दोलन
1946 का बंगाल का तेभागा आन्दोलन में किसानों ने 'फ्लाइड कमीशन' की सिफारिश के अनुरूप लगान की दर घटाकर एक तिहाई करने के लिए संघर्ष शुरू किया था.
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अखिल भारतीय किसान सभा
किसान सभा आंदोलन, बिहार में स्वामी सहजानंद सरस्वती के नेतृत्व में शुरू हुआ.