भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी कोलंबो यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत विकास परियोजना की राशि को दोगुना करने पर सहमति जताई। विदेश मंत्री ने अपनी दो दिवसीय यात्रा पर दोनों देशों के बीच संबंधों और आर्थिक संकट से कोलोंबो को निकलने के लिए क़र्ज़ पुनर्गठन योजना पर बात की।

जयशंकर ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और उनके छोटे भाई गोटबाया राजपक्षे से मुलाकात की। दोनों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने अपने बयान में कहा, " हमने यह महसूस किया है कि श्रीलंका के लेनदारों को इसकी वसूली के लिए दृढ़ता से कदम उठाने चाहिए। भारत ने श्रीलंका की मदद करने के लिए किसी और के बारे में नहीं सोचा, वही किया जो ठीक लगा। "

श्रीलंका सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा, "भारत की मदद से श्रीलंका में सामुदायिक विकास परियोजना पर 2005 में समझौता हुआ था। इस परियोजना की सीमा 30 करोड़ रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 60 करोड़ रुपये किया जाएगा।" श्रीलंका ने संकट के समय में भारत सरकार को मदद करने के लिए धन्यवाद किया।

जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार ने 16 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय मॉनेटरी फंड (IMF) को लिखित आश्वासन भी भेजा है। श्रीलंका के कई मंत्रियों से मिलने के अलावा, एस जयशंकर ने सरकार के कई वरिष्ठ नेताओं से भी बात की। उन्होंने विपक्ष के नेता सजीथ प्रेमदासा, उत्तर और पूर्व के कई तमिल नेताओं से भी मुलाक़ात की। इसके साथ ही भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने श्रीलंका के मत्स्य मंत्री डगलस देवनन से भी मछली पालन पर सहयोग को लेकर चर्चा की और इस क्षेत्र में साथ मिलकर काम करने की बात भी कही।